अमरकंटक के धारकुंडी आश्रम में गुरुदेव का मनाया गया 100वा जन्म उत्सव narmadanewstimes.in

 अमरकंटक के धारकुंडी आश्रम में गुरुदेव का मनाया गया 100वा जन्म उत्सव ।।



अमरकंटक :- श्रवण उपाध्याय      

                  मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली  पवित्र नगरी अमरकंटक के वार्ड 06  कपिलधारा रोड़ बांधा में स्थित परमहंस धारकुंडी आश्रम । यहां आश्रम की देखभाल करने वाले गुरुसेवक के रूप में बाबा लवलीन महाराज लंबे समय से आश्रम में सेवा दे रहे हैं । उन्होंने बताया की जनवरी के 01 तारीख को हमारे गुरुदेव का जन्मदिन पड़ता है जो इस बार बड़े ही धूमधाम से 100 वां जन्म दिन मनाया जायेगा । हमारा मुख्य गुरु स्थान रीवा से आगे चित्रकूट के पास हैं जहां हफ्तों से ज्यादा समय से गुरु पूजन और विशाल भंडारा चल रहा है । अमरकंटक में भी उनका एक छोटा आश्रम स्थापित हैं उसमें भी हम सब शिष्य गण मिल कर बड़े ही आनंद पूर्वक उनका जन्मदिन बनायेंगे । आश्रम में उस दिन गुरुपूजन होगा , कन्या भोजन और भंडारा चलेगा जो आज उत्साह के साथ मनाया गया । धारकुंडी महाराज जी का 100 वां जन्म उत्सव श्री परमहंस आश्रम धारकुंडी सतना के महाराज परमहंस स्वामी श्री सच्चिदानंद जी महाराज जी का 1 जनवरी 2024 को 100 वां जन्म उत्सव श्री परमहंस आश्रम धारकुंडी सतना मे व्यापक स्तर पर मनाने की तैयारी भक्त व संतो के द्वारा की गई हैं जिसमें लाखों भक्त भाविको के पहुंचने की उम्मीद बनी रहती हैं। स्वामी जी परम् तपस्वी हैं वे अपने साधना में लंबे समय तक कठोर तपस्या कर साधना को साधा था । आप बहुत छोटी उम्र में ही गृह त्याग कर ईश्वर प्राप्ति के लिए निकल पड़े कुछ वर्ष भ्रमण के पश्चात श्री परमहंस स्वामी श्री परमानंद महाराज श्री सति अनुसुइया चित्रकूट ने आप को ईश्वरीय आदेश से शिष्य स्वीकार किया तत्पश्चात 12 वर्षों के कठिन तप व गुरू सेवा से आप को परम लक्ष्य की प्राप्ति हुई । गुरुदेव के आदेश वा ईश्वरीय संकेतों को प्राप्त कर आप 22 नवम्बर 1956 को श्री परमहंस आश्रम धारकुंडी की गुफा मे जा कर आसन लगाया , जो जंगली जानवरों जैसे बाघ , भालू आदि की जगह थी किंतु ईश्वरीय प्रेरणा से आप सभी परिस्थितियों को अनुकूल करते गए । आज आश्रम मे लगभग 100 विरक्त संत महात्मा गुरु सेवा साधना मे रहते है वा हजारो भक्त भाविक रोज गुरु दर्शन आशिर्वाद व प्रसाद गृहण कर पुण्य के भागीदार बनते हैं ।आपने बहुमूल्य मानव जीवन को सफल बनाने मे लगे हैं । उनका इस समय अधिकतर समय मुंबई (महाराष्ट्र) में ही बीत रहा हैं । श्री परमहंस आश्रम धारकुंडी की एक शाखा अमरकंटक में भी हैं जो यहां पर भी गुरु जी का 100वां जन्मदिन बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया ।

एक टिप्पणी भेजें

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget