Narmada News Times

 कक्का की चौपाल — कोतमा बस स्टैंड, अग्रवाल लॉज हादसा स्थल से चलती सांसों की तलाश


कोतमा बस स्टैंड के पास अग्रवाल लॉज के मलबे पर शाम ढल चुकी है… लेकिन अंधेरा सिर्फ आसमान में नहीं, लोगों के चेहरों पर भी उतर आया है…

धूल अब भी हवा में तैर रही है… टूटी दीवारें, मुड़े हुए सरिए और बिखरे पत्थरों के बीच जेसीबी मशीनें लगातार चल रही हैं जैसे हर वार के साथ किसी की सांस तलाश रही हों…

एनडीआरएफ और एसडीआर एफ की टीमें दिन-रात जुटी हैं… हर पत्थर हटने पर भीड़ की सांस थम जाती है

“शायद कोई जिंदा हो…”

एक तरफ मशीनों की कर्कश आवाज… दूसरी तरफ परिजनों की सिसकियां… और इनके बीच खड़ी एक उम्मीद—जो टूटते-टूटते भी जिंदा है…

पास ही अफसरों की हलचल है… निर्देश दिए जा रहे हैं… लेकिन भीड़ की नजरें सिर्फ मलबे पर टिकी हैं—अंदर कोई सांस बाकी है या नहीं…

इसी अफरा-तफरी, डर और उम्मीद के बीच… भीड़ के एक किनारे खड़ी है कक्का की चौपाल…

कक्का चारों तरफ देखते हैं… आंखों में धूल भी है और दर्द भी…

“अरे भइया… ये सब यूं ही नहीं गिरता… पहले नींव कमजोर होती है… फिर एक दिन पूरा ढांचा बैठ जाता है…”

घसीटा बेचैन है… आवाज में गुस्सा और घबराहट दोनों

“कक्का! 30-40 फीट खुदाई हो रही थी… इतना बड़ा गड्ढा… किसी ने रोका क्यों नहीं? किसी को दिखा नहीं क्या?”

चौरंगी लाल हल्की हंसी के साथ कड़वा सच फेंकता है

“घसीटा… यहां देखने वाले सब देखते हैं… पर कागजों में सब ‘ठीक’ कर दिया जाता है… और फिर एक दिन… सच ऐसे ही ढह जाता है…”

भीड़ से अचानक आवाज आती है

“जल्दी करो… अभी भी लोग अंदर हैं…!”

कुछ लोग मलबे की तरफ दौड़ते हैं… कुछ पीछे हटते हैं… डर और उम्मीद आमने-सामने खड़े हो जाते हैं…

कक्का गहरी सांस लेकर बोलते हैं

“बात सीधी है बेटा… न सुरक्षा थी… न निगरानी… और न ही जिम्मेदारी… तभी तो ये हाल हुआ…”

घसीटा अब और तीखा हो जाता है

“तो कक्का… जिम्मेदार कौन? कौन लेगा इन मौतों का हिसाब?”

कक्का धीमे लेकिन धारदार शब्दों में जवाब देते हैं

“पूरा तंत्र…

नगर पालिका—जो रोक नहीं पाई…

इंजीनियर—जिसने खतरा नहीं देखा…

नगर पालिका का राजस्व विभाग जिसने निर्माण कार्य की सच्चाई को दबा कर रखा…

CMO—जिसने निगरानी नहीं की…

अध्यक्ष—जो जवाबदेह था… पर खामोश रहा…

और जिसने खुदाई करवाई… वो तो सीधा दोषी है ही…”

चौरंगी लाल भीड़ की तरफ देखते हुए तंज कसता है

“और अब देखना… जांच होगी… मुआवजा मिलेगा… फोटो खिंचेंगे… और फाइल बंद…”

तभी पास से जेसीबी रुकती है… हलचल होती है… एक युवक मलबे के बीच खड़ा दिखता है… धूल से सना चेहरा… लेकिन हाथ अब भी काम में लगे…

घसीटा इशारा करता है

“कक्का… देखो उसे… शाम से लगा है… रुका ही नहीं…”

कक्का की नजर उस पर टिक जाती है… आवाज भारी हो जाती है

“जानते हो कौन है वो…? हेमराज… गोविंदा गांव का… तीन घंटे तक मलबा हटाता रहा… उसे नहीं पता था… जिस मलबे को वो हटा रहा है… उसी के नीचे उसका अपना परिवार दबा है…”

भीड़ एकदम शांत हो जाती है…

कक्का आगे कहते हैं

“फिर मलबे से निकली लाश… उसके बाप की थी… और मामा… अब भी कहीं अंदर दबा है…”

घसीटा की आवाज कांप जाती है

“फिर… वो रुक गया होगा?”

कक्का सिर हिलाते हैं

“नहीं बेटा… वो फिर उसी मलबे में उतर गया… दूसरों को बचाने… और अपने को खोजने…”

चौरंगी लाल धीमे स्वर में बोलता है

“यही फर्क है… कुछ लोग कैमरे में दिख रहे हैं… और कुछ लोग दर्द में भी इंसानियत निभा रहे हैं…”

इसी बीच पास खड़े कुछ लोग आपस में फुस फुसाते हैं—

“पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है…”

घसीटा तुरंत कक्का की ओर देखता है

“कक्का! कुछ तो कार्रवाई हुई क्या?”

कक्का गंभीर स्वर में कहते हैं

“हाँ बेटा… पुलिस अधीक्षक  मोति उर् रहमान ने मीडिया को बताया है कि अग्रवाल लॉज के मालिक और जमीन स्वामी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हुआ है… बीएनएस की धारा 106 के तहत… अब मामला कोतमा थाने में विवेचना में है…”

चौरंगी लाल फिर कटाक्ष करता है

“देखते हैं… ये केस भी सच्चाई तक पहुंचता है… या कागजों में ही दम तोड़ देता है…”

कक्का आगे जोड़ते हैं

“सरकार ने भी मृतकों के परिजनों को 9 लाख और घायलों को 2.50 लाख की सहायता देने की घोषणा की है…”

घसीटा की आंखें फिर मलबे की ओर चली जाती हैं

“कक्का… पैसा तो मिल जाएगा… पर जो चला गया… वो कैसे लौटेगा?”

कक्का की आवाज भर्रा जाती है

“बेटा… मुआवजा दर्द कम कर सकता है… खत्म नहीं…”

तभी जेसीबी दोबारा चलती है… भीड़ फिर चुप हो जाती है… हर आंख उसी जगह टिक जाती है…

अचानक आवाज गूंजती है

“धीरे… यहां कुछ हो सकता है…”

पूरा माहौल थम जाता है… सांसें रुक जाती हैं…

कक्का धीरे से कहते हैं

“डर ये नहीं है कि कौन दबा है… डर ये है… कहीं सच भी मलबे में ही दब न जाए…”

और फिर चौपाल में सन्नाटा छा जाता है…

कुछ पल बाद कक्का भीड़ की ओर देखते हुए आखिरी सवाल छोड़ते हैं

“बताओ भइया… क्या इस मलबे से सिर्फ लोग निकलेंगे… या उन गलतियों का सच भी बाहर आएगा… जिनकी वजह से ये सब हुआ?”

जेसीबी फिर चलती है… धूल फिर उड़ती है…

और कोतमा बस स्टैंड का यह हादसा…

अभी भी खत्म नहीं हुआ…

 *पीढ़ियों के बीच संवाद ही सशक्त समाज की आधारशिला : प्रो. सक्सेना




अनूपपुर। 06 अप्रैल 2026

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय तुलसी महाविद्यालय, अनूपपुर में इंटरजेनेरेशनल बॉन्डिंग विषय पर एक संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के समाज कार्य विभाग के सहयोग से संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में अमरकंटक विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय फुकन, डॉ. रमेश बी. तथा योग विभाग के प्राध्यापक डॉ. श्यामसुंदर पाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ विश्वविद्यालय के शोधार्थी एवं विद्यार्थी भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी को कम करना अत्यंत आवश्यक है। इंटरजेनेरेशन बॉन्डिंग के माध्यम से हम पारिवारिक एवं सामाजिक मूल्यों को पुनर्स्थापित कर सकते हैं। युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के बीच संवाद एवं अनुभवों का आदान-प्रदान ही सशक्त समाज की आधारशिला है।

इस अवसर पर डॉ. दिग्विजय फुकन ने अपने वक्तव्य में कहा कि समाज की सतत प्रगति के लिए आवश्यक है कि विभिन्न पीढ़ियाँ एक-दूसरे के अनुभवों और दृष्टिकोणों को समझें। वृद्धों के जीवनानुभव और युवाओं की ऊर्जा का समन्वय समाज को नई दिशा प्रदान करता है।

डॉ. रमेश बी. ने सामाजिक संरचना में परिवार की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पीढ़ियों के बीच सतत संवाद समाज की स्थिरता के लिए आवश्यक है।

योग विभाग के प्राध्यापक डॉ. श्यामसुंदर पाल ने योग एवं भारतीय जीवन पद्धति के माध्यम से पीढ़ियों के मध्य समन्वय स्थापित करने पर बल दिया।

वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. जे. के. संत ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक तकनीकी युग में मानवीय संबंधों में बढ़ती दूरी को कम करने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं, जो सामाजिक मूल्यों को पुनर्जीवित करते हैं।

इस अवसर पर डॉ. राधा सिंह एवं अन्य प्राध्यापकगण भी उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम का आयोजन शासकीय तुलसी महाविद्यालय, अनूपपुर के समाजशास्त्र विभाग तथा अमरकंटक विश्वविद्यालय के समाजकार्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. ज्ञान प्रकाश पाण्डेय, सहायक प्राध्यापक (समाजशास्त्र) रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. नीरज श्रीवास्तव, प्रो. विनोद कुमार कोल, प्रो. शाहबाज खान, डॉ. नंदलाल गुप्ता, डॉ. तरन्नुम सरवत सहित अन्य प्राध्यापकों का विशेष सहयोग रहा।

 अग्रवाल लाज के हादसे पर भाजपा नेताओं ने व्यक्त की शोक संवेदना


अनूपपुर। शनिवार शाम कोतमा नगर के हृदय स्थल बस स्टैंड के पास अग्रवाल लाज की चार मंजिला बिल्डिंग अचानक ढह गई। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए। घटनास्थल पर सनसनी फैल गई।

मध्य प्रदेश शासन के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं कोतमा विधायक दिलीप जायसवाल तत्काल मौके पर पहुंचे। इसके बाद वन एवं पर्यावरण मंत्री व अनूपपुर जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार तथा भाजपा जिला अध्यक्ष हीरा सिंह श्याम भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति पर नजर बनाएं रखी। शहडोल सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह ने अनूपपुर कलेक्टर से फोन पर बात कर पूरी जानकारी ली।

मलबा हटाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन जिला प्रशासन व राहत-बचाव टीम रातभर कार्यरत रही। दोनों मंत्री शनिवार रात से रविवार तक मौके पर डटे रहे।

मंत्री दिलीप जायसवाल व दिलीप अहिरवार ने कहा, यह अत्यंत दुखद घटना है। जांच चल रही है, दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। मृतक परिजनों को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से 4-4 लाख, संबल योजना से 4-4 लाख तथा रेडक्रॉस से 1-1 लाख की सहायता दी जाएगी। घायलों को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से 2-2 लाख व रेडक्रॉस से 50-50 हजार रुपये मिलेंगे। राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।

इस हादसे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह, अनूपपुर विधायक बिसाहू लाल सिंह, प्रदेश प्रवक्ता रामलाल रौतेल, जिला अध्यक्ष हीरा सिंह श्याम, पूर्व जिला अध्यक्ष रामदास पुरी, आधा राम वैश्य, नगर पालिका अध्यक्ष अजय सराफ, राम अवध सिंह, श्रीमती साहिबा पनिका, नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. सुनील चौरसिया, यशवंत सिंह, जिला मीडिया प्रभारी राजेश सिंह सहित भाजपा नेताओं ने दिवंगत आत्माओं की शांति व घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

 *श्री हनुमान जी के जयकारों के उद्घोष से सराबोर हुई नगरी*



श्री हनुमान जन्मोत्सव महापर्व पर आयोजित हुए भक्तिमय 

* अमलाई  । हनुमान जन्मोत्सव महापर्व पर अपनी संपूर्ण ऊर्जा और निष्ठा के साथ सहभागिता देना यह वाकई में भावी पीढ़ी के लिए अनुकरणीय संदेश हैं जिसे भावी पीढ़ी जो आत्मसात अवश्य करना चाहिए ।अमलाई नगर में श्री हनुमान जी का प्रगट उत्सव बड़ी ही धूमधाम एवं भक्तिमय माहौल में मनाया गया नगर के वार्ड क्रमांक 5 सिद्ध बाबा पहाड़ी में स्थित एकादश मुखी हनुमान मंदिर में मारुति नंदन सेवा समिति एवं सनातन धर्म सत्संग समाज के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित श्री हनुमान जन्म महोत्सव महापर्व की तैयारी बड़ी ही भव्यता के साथ की गई थी ,नगरी मानों श्री राम मय हो गई, श्री हनुमान जी के विधिवत पूजन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ श्री हनुमान जी का पूजन अर्चन के पश्चात हवन पूर्णाहुति दी गई एवं इसके उपरांत कन्या भोज का आयोजन किया गया तत्पश्चात विशाल भंडार का आयोजन किया गया भंडारा दोपहर 2:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक लगातार चलता रहा । सनातनी की शक्ति जिस तरह से सनातन पर्वों पर उमड़ कर दिखती है यह सनातन के स्वर्णिम भविष्य  जीवंत उदाहरण है।

 *मध्यप्रदेश बिजली कर्मचारी महासंघ के 11 सूत्रीय मांग पत्र के समर्थन में प्रांतव्यापी धरना प्रदर्शन के आव्हान पर थर्मल पावर प्लांट चचाई के द्वार पर सैकड़ों कर्मियों ने दिया धरना*


 *भामसं के अखिल भारतीय मंत्री व विद्युत प्रभारी  आर एस जायसवाल जी और अखिल भारतीय विद्युत् सेवानिवृत्त कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री  अरुण देवांगन जी भी  हुए शामिल* 

चचाई । संविदा कर्मचारियों के नियमितिकरण,कर्मचारियों की वेतन विसंगति समाप्त करने,पुरानी पेंशन बहाली, आउटसोर्स कर्मियों को ठेकेदारों के शोषण से मुक्त करने हेतु हरियाणा उत्तर प्रदेश मॉडल पर स्वतंत्र निगम बनाकर उसके माध्यम से वेतन देने, ग्रेच्युटी राशि को केंद्र के अनुरूप 25 लाख करने सहित 11 मांगो के समर्थन में 11 बजे से धरना प्रारंभ हुआ । 

धरना रत सैकड़ों कर्मियों को सम्बोधित करते हुए भामस के विद्युत प्रभारी  आर एस जायसवाल जी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर 4 नए कानून लाए गए है जिसमें दो कानूनों का समर्थन भामसं ने किया गया है तथा दो कानूनों के कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज करते हुए इसे संशोधित करने की मांग केंद्रीय श्रम मंत्री से की गई है सरकार ने आश्वस्त किया है कि शीघ्र ही इस पर विचार कर निर्णय लिए जाएंगे, नए श्रम कानूनों में ठेका श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित करने, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उपायों के तहत पूरे देश के सभी कामगारों को न्यूनतम वेतन निर्धारित करने, नियुक्ति पत्र प्रदान करने, स्वास्थ्य सुरक्षा देने, काम के निर्धारित समय बाद काम लेने पर ओवर टाइम देने, जैसे अनेक उपाय किए गए है। 

विद्युत सेवानिवृत्त महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री  अरुण देवांगन जी ने कहा कि मध्यप्रदेश पावर कम्पनी में ग्रेच्युटी राशि केंद्र के अनुरूप 25 लाख अब तक प्रदान न करने, उच्च पद पर नियुक्ति होने पर पूर्व प्राप्त वेतन संरक्षण प्रदान न करने, वरिष्ठ और कनिष्ठ  कर्मचारियों के वेतन निर्धारण में भारी विसंगति होने, पावर कम्पनी में लगातार कुशल नियमित  कर्मचारियों की कमी होने के लिए प्रशासन की नीति को जिम्मेदार ठहराते हुए इसके निराकरण की मांग की गई ।

भामसं मध्यप्रदेश के प्रदेश कार्य समिती सदस्य एवं भारतीय ठेका मजदूर संघ शहडोल संभाग के संभागीय महामंत्री  ताराचंद यादव जी ने ठेका श्रमिकों के शोषण के विरुद्ध संघर्ष का आव्हान किया । 

कृषि एवं वनवासी ग्रामीण महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री  कृष्ण कुमार बैगा जी और कोयला उद्योग के  महेंद्र पाल जी ने भी अपने संबोधन में बिजली कर्मचारी महासंघ की मांगो से सहमति जताते हुए अपना समर्थन व्यक्त किया ।

अखिल भारतीय विद्युत् मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय मंत्री  सतेन्द्र पाटकर जी ने अपने संबोधन में कहा कि यदि आज के प्रांत व्यापी आंदोलन के दूसरे चरण को प्रबंधन ने गंभीरता से नहीं लिया तो आगामी 16 अप्रैल को तीसरे चरण के आंदोलन में हजारों बिजली कर्मचारी भोपाल कूच कर विशाल रैली निकाल कर धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे जिसके लिए शासन प्रशासन जिम्मेदार होगा ।  पाटकर जी ने शाम 5.30 बजे धरना समापन की घोषणा करते हुए सहयोग के लिए सभी साथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया ।

 पैतृक भूमि विवाद का सुखद अंत: टोरेंट पावर की पहल से जुड़े बिखरे रिश्ते, दिव्यांग रामदीन को मिली नई उड़ान


अनूपपुर । रक्सा कोलमी ग्राम महुदा के निवासी रामदीन राठौर के परिवार में वर्षों से सुलग रहा पैतृक भूमि विवाद आखिरकार शांत हो गया। रक्सा-कोलमी की उस जमीन ने, जिसने कभी रिश्तों में दूरियां पैदा कर दी थीं, अब फिर से अपनापन लौटा दिया है। चार परिवारों के बीच चला आ रहा यह लंबा मतभेद अब Torrent Power के संवेदनशील हस्तक्षेप से समाप्त हो गया है। इस पहल को ग्रामीणों ने केवल समाधान नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने वाली एक मानवीय मिसाल बताया है।

*विवाद की पृष्ठभूमि*

जानकारी के अनुसार, पैतृक भूमि के मुआवजे को लेकर विवाद की शुरुआत हुई थी। एक परिवार द्वारा कंपनी से मुआवजा प्राप्त कर लिया गया, जबकि शेष भूमि पर तीन अन्य परिवार वर्षों से खेती करते रहे। समय बीतता गया और जमीन का यह बंटवारा दिलों में भी दरार बनता चला गया। जहां कभी एक ही आंगन में हंसी गूंजती थी, वहां अब खामोशी और दूरी ने जगह ले ली थी।

कंपनी की पहल से सुलझा मामला

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कंपनी के अधिकारियों ने इसे केवल एक विवाद नहीं, बल्कि एक बिखरते परिवार की पीड़ा के रूप में देखा।  एस. के ,मिश्रा  महाप्रबंधक

ओ. पी. नैनीवाल – सहायक महाप्रबंधक

धीरज सिंह  (AGM)

सुधाकर पाण्डेय  (Consultant) ने सभी चारों परिवारों को एक साथ बैठाकर संवाद का रास्ता चुना।

कभी भावनाएं उमड़ीं, तो कभी चुप्पी ने शब्दों का स्थान लिया, लेकिन अंततः समझ और सहमति की जीत हुई। दशकों से चला आ रहा यह विवाद आपसी सहमति से समाप्त हुआ और वर्षों बाद चारों परिवारों के चेहरे पर एक साथ सुकून नजर आया।

दिव्यांग रामदीन को मिला सहारा

इस घटनाक्रम के बीच एक और भावुक पहल सामने आई। रामदीन राठौर, जिनके दोनों पैर उनका साथ नहीं देते, अब तक हर छोटे-बड़े काम के लिए दूसरों पर निर्भर थे। उनके जीवन की यह मजबूरी जैसे एक अनकहा दर्द बन चुकी थी।

कंपनी ने इस दर्द को महसूस किया और उन्हें तीन पहिया स्कूटर खरीदने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की। यह सहायता केवल एक साधन नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान को लौटाने की एक कोशिश थी।

जीवन में आया नया उजाला

स्कूटर मिलने के बाद रामदीन की जिंदगी जैसे बदल गई। अब वे खुद अपने कामों के लिए निकलते हैं, गांव की गलियों में आत्मविश्वास के साथ चलते हैं। उनकी आंखों में चमक और चेहरे पर संतोष यह बताने के लिए काफी है कि यह बदलाव उनके लिए कितना बड़ा है।

भावुक होकर रामदीन कहते हैं,

“जिंदगी का बड़ा हिस्सा दूसरों के सहारे बीता… लेकिन अब लगता है कि मैं भी अपने पैरों पर खड़ा हूं। यह सिर्फ स्कूटर नहीं, मेरी आजादी है।”

ग्रामीणों ने की सराहना

गांव के लोगों ने इस पहल को दिल से सराहा है। उनका कहना है कि यह केवल जमीन के विवाद का अंत नहीं, बल्कि रिश्तों में आई दूरियों को खत्म करने की शुरुआत है। चारों परिवारों के बीच बनी सहमति और रामदीन को मिली सहायता ने पूरे गांव में एक संदेश दिया है।

सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण

टोरेंट पावर कंपनी का यह प्रयास यह दर्शाता है कि जब उद्योग केवल विकास नहीं, बल्कि इंसानियत को भी प्राथमिकता देते हैं, तो बदलाव गहरा और स्थायी होता है।

यह घटना बताती है कि

जहां संवेदनशीलता होती है, वहां समाधान अपने आप जन्म लेता है…

और जहां सहयोग होता है, वहां हर संघर्ष एक नई शुरुआत बन जाता है।


समाज कार्य विभाग, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय द्वारा टीबी जागरूकता अभियान आयोजित


अमरकंटक । इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के मास्टर ऑफ सोशल वर्क (प्रथम सेमेस्टर) के विद्यार्थियों द्वारा विश्वविद्यालय के निकट के ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी (क्षय रोग) के रोकथाम हेतु जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया। यह कार्यक्रम विश्व टीबी दिवस (24 मार्च) के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण समुदायों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इसके लक्षण, उपचार एवं रोकथाम के बारे में जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम का समन्वयन विभाग की शोधार्थी सुश्री जे. जिनिमोल द्वारा किया गया। इस अभियान को विभाग के संकाय सदस्यों एवं अन्य शोधार्थियों का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।

अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों ने निकटवर्ती गांवों में घर-घर जाकर जागरूकता अभियान (डोर-टू-डोर विजिट) चलाया। उन्होंने ग्रामीणों को टीबी के लक्षणों, समय पर जांच एवं उपचार की आवश्यकता, तथा सरकार द्वारा उपलब्ध निःशुल्क उपचार सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों ने पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के सदस्यों के साथ भी संवाद स्थापित किया तथा सामुदायिक स्तर पर टीबी उन्मूलन के लिए सहयोग और भागीदारी का आग्रह किया।

यह अभियान माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के टीबी उन्मूलन के आह्वान के अनुरूप संचालित किया गया, जिसमें वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न पोस्टर एवं जागरूकता सामग्री के माध्यम से संदेश प्रसारित किया और लोगों को टीबी के प्रति भ्रांतियों से बाहर आने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने “Yes, We Can End TB” (हाँ, हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं) का संदेश व्यापक रूप से प्रसारित किया, जिससे समुदाय में सकारात्मक दृष्टिकोण और सहभागिता की भावना विकसित हो। समाज कार्य विभाग के संकाय सदस्यों ने अनुसार इस प्रकार के फील्ड-आधारित कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान को सुदृढ़ करने के साथ-साथ समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता को भी बढ़ाते हैं।

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