Narmada News Times

 *स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर ने सिद्दीकी को दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों में स्थान दिया


*

 पटियाला । सिद्दीकी भोपाल के दामाद भी है, उनकी पत्नी उजमा भोपाल मेमोरियल में जनसंपर्क अधिकारी रही हैं।

भारत और पंजाब दोनों के लिए गर्व की बात है कि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी–एल्सेवियर की वैश्विक वैज्ञानिक रैंकिंग 2026 में प्रोफेसर रफ़ात सिद्दीकी को दुनिया के शीर्ष शोधकर्ताओं में शामिल किया गया है। इस रैंकिंग में उन्हें विश्वभर के वैज्ञानिकों के शीर्ष 0.012 प्रतिशत में स्थान मिला है।

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा तैयार और एल्सेवियर द्वारा प्रकाशित यह रैंकिंग वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रभाव और महत्त्व का आकलन करने के लिए मानकीकृत उद्धरण संकेतकों (Citation Indicators) का उपयोग करती है।

प्रोफेसर सिद्दीकी, थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (TIET), पटियाला में वरिष्ठ प्रोफेसर तथा डीन (सस्टेनेबिलिटी एंड इम्पैक्ट) हैं। नवीनतम रैंकिंग में उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली शोधकर्ताओं में मान्यता मिली है।

यह प्रतिष्ठित मूल्यांकन इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्राकृतिक विज्ञान और सामाजिक विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों के वैज्ञानिकों के कार्यों का आकलन करता है। इसमें अनुसंधान के प्रभाव को मापने के लिए कई संकेतकों का उपयोग किया जाता है। इनमें कुल उद्धरण, एच-इंडेक्स, सह-लेखकों के योगदान के अनुसार समायोजित एचएम-इंडेक्स, लेखक की स्थिति के आधार पर उद्धरण और संयुक्त उद्धरण स्कोर (सी-स्कोर) शामिल हैं।

वर्ष 2026 की करियर रैंकिंग में प्रोफेसर सिद्दीकी ने 2,43,950 वैज्ञानिकों में विश्व स्तर पर 3,003वाँ स्थान हासिल किया। इस उपलब्धि के साथ वे दुनिया के शीर्ष 0.012 प्रतिशत शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं में शामिल हो गए हैं।

भवन निर्माण और निर्माण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रोफेसर सिद्दीकी ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। उन्होंने भारत में प्रथम और विश्व स्तर पर सातवाँ स्थान प्राप्त किया है।

वर्ष 2019 में स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर रैंकिंग की शुरुआत से ही वे लगातार दुनिया के अग्रणी वैज्ञानिकों में शामिल रहे हैं। इस पूरी अवधि के दौरान वे वैश्विक स्तर पर शीर्ष 0.025 प्रतिशत वैज्ञानिकों में अपना स्थान बनाए रखने में सफल रहे हैं।

वर्ष 2026 की रैंकिंग में उनका प्रदर्शन वर्ष 2025 की तुलना में बेहतर हुआ है। वर्ष 2025 में वे वैश्विक स्तर पर शीर्ष 0.014 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल थे। यह सुधार उनके शोध योगदान की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है।

प्रोफेसर सिद्दीकी ने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS), पिलानी से अपनी पीएचडी पूरी की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के विस्कॉन्सिन-मिलवॉकी विश्वविद्यालय में पोस्ट-डॉक्टोरल शोध किया।

शिक्षण, अनुसंधान, शैक्षणिक नेतृत्व और प्रशासन के क्षेत्र में 37 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ वे टिकाऊ निर्माण सामग्री और कंक्रीट प्रौद्योगिकी के एक अग्रणी विशेषज्ञ के रूप में व्यापक रूप से जाने जाते हैं।

इस उपलब्धि पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए प्रोफेसर सिद्दीकी ने कहा:

“इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी है और मुझे खुशी है कि मेरे कार्य को यह सम्मान मिला है। इस पेशे के प्रति मेरी प्रतिबद्धता आगे भी जारी रहेगी, क्योंकि इस क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।”

उन्होंने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 250 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं और 80 से अधिक कॉन्फ्रेंस पेपर प्रस्तुत किए हैं। उनके शोध कार्यों को Google Scholar पर 35,000 से अधिक उद्धरण प्राप्त हुए हैं, जबकि उनका एच-इंडेक्स 97 है।

प्रोफेसर सिद्दीकी एल्सेवियर, टेलर एंड फ्रांसिस तथा अमेरिकन सोसाइटी ऑफ सिविल इंजीनियर्स (ASCE) द्वारा प्रकाशित कई प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं के संपादकीय मंडलों में भी अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

अपने करियर के दौरान वे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, फिनलैंड, ऑस्ट्रेलिया, चीन, मलेशिया, थाईलैंड, मैक्सिको और कई अन्य देशों के विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में विज़िटिंग और आमंत्रित प्रोफेसर के रूप में कार्य कर चुके हैं। साथ ही, उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में शोध संबंधी नियुक्तियाँ भी प्राप्त की हैं।

इस उपलब्धि का सार: प्रोफेसर रफ़ात सिद्दीकी ने अपने 37 वर्षों से अधिक के शैक्षणिक और शोध अनुभव, 250 से अधिक शोध-पत्रों तथा 35,000 से अधिक उद्धरणों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय पहचान बनाई है। वर्ष 2026 की रैंकिंग में उनका स्थान भारत, पंजाब और थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला के लिए गर्व का विषय है।

 राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में रंजीत सिंह ने जीता स्वर्ण पदक


राष्ट्रीय शालेय प्रतियोगिता के लिए किया क्वालीफाई, भारत ज्योति विद्यालय, अनूपपुर में हर्ष का माहौल

अनूपपुर। मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिवपुरी में आयोजित 70वीं शालेय राज्य स्तरीय बालक-बालिका एथलेटिक्स प्रतियोगिता में शहडोल संभाग के खिलाड़ी रंजीत सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर संभाग एवं अपने विद्यालय का नाम रोशन किया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से भारत ज्योति विद्यालय, अनूपपुर में हर्ष और उत्साह का माहौल है।

7 अक्टूबर से 11 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 9 अक्टूबर को हुए तवा फेंक (डिस्कस थ्रो) के फाइनल मुकाबले में रंजीत सिंह ने 28.55 मीटर की दूरी तक तवा फेंककर प्रथम स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस शानदार प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने आगामी राष्ट्रीय शालेय प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के लिए भी अपना स्थान सुनिश्चित किया है। राष्ट्रीय शालेय प्रतियोगिता का आयोजन 12 से 16 नवंबर 2026 तक शिवपुरी में प्रस्तावित है।

रंजीत सिंह, पिता  मोहन सिंह एवं माता श्रीमती गायत्री देवी, की इस सफलता के पीछे उनकी मेहनत, अनुशासन, नियमित अभ्यास और खेल के प्रति समर्पण का महत्वपूर्ण योगदान है। उनकी यह उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।

विद्यालय परिवार ने दी बधाई

रंजीत सिंह की इस उल्लेखनीय सफलता पर भारत ज्योति विद्यालय, अनूपपुर के प्राचार्य फादर जी. अलेक्जेंडर, उपप्राचार्या सिस्टर जिस मारिया तथा समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। विद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि वे राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्य प्रदेश और विद्यालय का गौरव बढ़ाएँगे।

विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि विद्यार्थियों की खेल प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और उन्हें अपनी क्षमताओं को निखारने के अवसर प्रदान करना विद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है। रंजीत सिंह की यह स्वर्णिम सफलता मेहनत, लगन और निरंतर अभ्यास से लक्ष्य प्राप्त करने का प्रेरक उदाहरण है।

प्रशासनिक और खेल अधिकारियों ने दी बधाई

रंजीत सिंह की इस ऐतिहासिक स्वर्णिम विजय और राष्ट्रीय स्तर पर चयन होने की खबर मिलते ही शहडोल संभाग के प्रशासनिक और खेल गलियारों में खुशी की लहर दौड़ गई। संयुक्त संचालक (लोक शिक्षण) शहडोल संभाग उमेश कुमार धुर्वे, जिला शिक्षा अधिकारी शहडोल अतुल चौधरी, उमरिया के जिला शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र वर्कडे, अनूपपुर के जिला शिक्षा अधिकारी तुलाराम आर्मो तथा सहायक संचालक (खेल) रईस अहमद और सुदर्शन मिश्रा ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए खिलाड़ी को बधाई दी।

इसके साथ ही जिला खेल अधिकारी (उमरिया) शेख सलीम, जिला खेल अधिकारी (शहडोल) रामरुद्र पटेल, जिला खेल अधिकारी (अनूपपुर) खलील कुरैशी तथा टीम के साथ मैदान पर मुस्तैद प्रमुख प्रबंधक राजेश कुमार वर्मा, कोच अंकित कुशवाहा एवं श्रीमती संतोष कोल सहित वरिष्ठ अधिकारियों और खेल प्रशिक्षकों ने रंजीत सिंह के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। अधिकारियों ने विश्वास जताया है कि रंजीत आगामी नेशनल गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीतकर मध्य प्रदेश का मान पूरे देश में बढ़ाएंगे।



 जिला न्यायालय में ‘उल्लास’ कार्यक्रम का हुआ आयोजन

50 बच्चों ने प्रस्तुत की अपनी प्रतिभा, नृत्य, गायन और रंगोली में बिखेरा हुनर

अनूपपुर । 10 अक्टूबर2026 जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को बच्चों की रचनात्मकता, प्रतिभा और आत्मविश्वास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘उल्लास  एक अभिनव प्रयोग’ नामक सांस्कृतिक एवं मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती माया विश्व लाल के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 50 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम में बच्चों ने फैंसी ड्रेस, गायन, नृत्य, रंगोली और कविता-पाठ सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों की रंग-बिरंगी प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना था, जहाँ वे अपनी रचनात्मक क्षमता, कलात्मक अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास को विकसित कर सकें।

कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती माया विश्व लाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव  रवेंद्र कुमार सोनी जी, अधिवक्ताओं, न्यायालयीन कर्मचारियों, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं, अभिभावकों और अन्य अतिथियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की तथा बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

अतिथियों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे बच्चों में छिपी प्रतिभा निखरती है और उनके भीतर आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच तथा आगे बढ़ने की प्रेरणा विकसित होती है।

कार्यक्रम में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। वहीं, सभी प्रतिभागी बच्चों को उनकी सहभागिता और उत्साह के लिए उपहार देकर प्रोत्साहित किया गया। आयोजकों का उद्देश्य बच्चों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती शब्द अधारी, एनीमेटर/आयोजक द्वारा किया गया। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी न्यायिक अधिकारियों, प्रतिभागी बच्चों, अभिभावकों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में रात्रिभोज का आयोजन भी किया गया।

‘उल्लास  एक अभिनव प्रयोग’ के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, रचनात्मकता और प्रतिभा संवर्धन को बढ़ावा देने के साथ जिला न्यायपालिका, अधिवक्ताओं, न्यायालयीन कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच आपसी सहयोग एवं सामुदायिक भावना को मजबूत करने का प्रयास किया गया।

 🌹 हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं🌹

लवली खनूजा भाई जी।।

असेंबली ऑफ एमपी जर्नलिस्ट्स


आदरणीय  लवली खनूजा जी को प्रांतीय संगठन सचिव के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय  राधावल्लभ शारदा जी द्वारा आपको यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा जाना आपके अनुभव, कार्यक्षमता एवं संगठन के प्रति समर्पण का सम्मान है।

हमें पूर्ण विश्वास है कि आपके नेतृत्व, निष्ठा और सक्रिय भूमिका से संगठन को नई मजबूती मिलेगी तथा पत्रकारों के हितों की रक्षा एवं उनके सम्मान को बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य होंगे।

💐 आपके उज्ज्वल कार्यकाल एवं सफल भविष्य के लिए अनंत मंगलकामनाएं। 💐

 भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा पीआर टी महाविद्यालय अनूपपुर में मोबाइल डी-एडिक्शन कार्यशाला आयोजित




“रील लाइफ से निकलकर रियल लाइफ में आएं और उज्ज्वल भविष्य का आधार मजबूत बनाएं” — डॉ. देवेंद्र तिवारी

अनूपपुर। दिनांक 08 सितंबर 2026 भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला अनूपपुर द्वारा सेवा संस्कार अभियान के अंतर्गत कलेक्टर  रत्नाकर झा के निर्देशानुसार एवं सभापति डॉ. आर.पी. सोनी के मार्गदर्शन में पीआर टी महाविद्यालय अनूपपुर में मोबाइल डी-एडिक्शन (मोबाइल की लत से मुक्ति) विषय पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की मुख्य वक्ता इस्कॉन अनूपपुर की सुश्री गौरांगी भारद्वाज रहीं।

कार्यशाला में विद्यार्थियों के बीच बढ़ते मोबाइल उपयोग और उसके दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। सुश्री गौरांगी भारद्वाज ने अत्यंत सरल, रोचक एवं प्रेरक शैली में विद्यार्थियों को समझाया कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग एकाग्रता में कमी, मानसिक थकान, आँखों पर प्रतिकूल प्रभाव तथा व्यवहार एवं दिनचर्या में असंतुलन जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल के प्रति अपनी निर्भरता कम करने, समय का सदुपयोग करने, अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करने तथा वास्तविक जीवन के रिश्तों और गतिविधियों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। इनके साथ सुश्री विशाखा ने भी विद्यार्थियों के समक्ष प्रेरक उद्बोधन दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के सदस्यों एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकों का स्वागत किया गया। इसके बाद मुख्य वक्ता सुश्री गौरांगी भारद्वाज ने अपने प्रेरक उद्बोधन के माध्यम से विद्यार्थियों को डिजिटल संतुलन एवं सकारात्मक जीवन शैली का महत्व समझाया। लगभग दो घंटे चले इस सत्र में विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह एवं गंभीरता के साथ सहभागिता की और मोबाइल की लत से बचने के व्यावहारिक उपायों को समझा।

इस अवसर पर भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी से  अशोक शर्मा कोषाध्यक्ष, अनिल तिवारी, रामप्रकाश द्विवेदी तथा पीआर टी महाविद्यालय के संचालक एवं रेडक्रॉस सोसायटी अनूपपुर के सचिव डॉ. देवेंद्र तिवारी सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

डॉ. देवेंद्र तिवारी ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन उसका विवेक पूर्ण और सीमित उपयोग ही सफलता का आधार है। विद्यार्थियों को रील लाइफ की आभासी दुनिया में उलझने के बजाय रियल लाइफ के लक्ष्यों, शिक्षा, कौशल विकास और व्यक्तित्व निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। “रील लाइफ से निकलकर रियल लाइफ में आएं और अपने उज्ज्वल भविष्य का आधार मजबूत बनाएं” का संदेश देते हुए उन्होंने डिजिटल संतुलन, समय के सदुपयोग एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने पर बल दिया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता सुश्री गौरांगी भारद्वाज को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। महाविद्यालय परिवार एवं भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से उनके प्रेरणादायी उद्बोधन तथा विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए आभार व्यक्त किया गया।

यह कार्यशाला विद्यार्थियों में मोबाइल के विवेकपूर्ण उपयोग, आत्म-अनुशासन और स्वस्थ डिजिटल आदतों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।

 तुलसी महाविद्यालय में 'अखिल भारतीय शिक्षा समागम 2026' के अंतर्गत सांस्कृतिक एवं पारंपरिक कार्यक्रम का आयोजन




अनूपपुर । प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस शासकीय तुलसी महाविद्यालय अनूपपुर में प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार सक्सेना के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में अखिल भारतीय शिक्षा समागम 2026 की थीम NEP: शिक्षा से विकसित भारत के अंतर्गत सांस्कृतिक एवं पारंपरिक कला कार्यक्रम का आयोजन किया गया कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ प्राध्यापक  डॉ जे के संत, डॉ राधा सिंह एवं सुधा साहू, डॉ नीरज श्रीवास्तव की गरिमा में उपस्थिति रही। 

कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न प्रस्तुतियां दी गई जिनमें छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य एवं घूमर नृत्य प्रमुख आकर्षण रहे साथ ही रंगोली के माध्यम से NEP 2020, 2047 में शिक्षा की परिकल्पना, ज्ञान से विकास जैसे संदेश अपने रंगोली के माध्यम से दर्शाए गए। 

इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्राचार्य ने कहा कि NEP -2020 का उद्देश्य शिक्षा को ज्ञान के साथ-साथ कौशल, रचनात्मक, संस्कृति एवं व्यक्तित्व विकास से जोड़ना है। डॉ. सरिता सिंह परिहार के द्वारा मंच संचालन, कार्यक्रम का सफल आयोजन डॉ. फरहा नाज़, डॉ. तरन्नुम शरबत, अंजलि कहार, श्रीमती वंदना प्रजापति के द्वारा रहा इस अवसर पर अनुपमा सिंह धुर्वे, डॉ शैली अग्रवाल, डॉ शोभा तिवारी,  ज्योति रौतेल, शिवानी पटेल आकांक्षा एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ. मीना सिंह ने प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। शिक्षा से विकसित भारत की भावना को साकार करते हुए कार्यक्रम उत्साह एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

 AI और Gen-Z की रोजगार क्षमता पर शोध करेंगे आईजीएनटीयू के शोधार्थी जीयाराम


ICSSR की फुल-टाइम डॉक्टोरल फेलोशिप के लिए शोध प्रस्ताव स्वीकृत, डॉ. विनोद सेन के निर्देशन में होगा शोध

अमरकंटक। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), अमरकंटक के अर्थशास्त्र विभाग के शोधार्थी जीयाराम के शोध प्रस्ताव को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा जारी फुल-टाइम डॉक्टोरल फेलोशिप के अंतर्गत स्वीकृति मिली है। जीयाराम के शोध का विषय “AI and Employability Among Gen-Z” है।

जीयाराम का शोध कार्य अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. विनोद सेन के निर्देशन जारी हैं। उनका शोध वर्तमान समय में तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक और Gen-Z युवाओं की रोजगार क्षमता (Employability) के बीच संबंधों का अध्ययन करेगा।

तकनीकी बदलावों के दौर में रोजगार के स्वरूप और कार्यक्षेत्र की आवश्यकताएं तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में AI के बढ़ते प्रभाव के बीच Gen-Z युवाओं के कौशल, रोजगार के अवसरों, आवश्यक दक्षताओं तथा बदलते श्रम बाजार के अनुरूप उनकी तैयारी का अध्ययन महत्वपूर्ण है। जीयाराम का शोध इसी संदर्भ में AI और Gen-Z की employability के विभिन्न आयामों को समझने का प्रयास करेगा।

ICSSR की प्रतिष्ठित फुल-टाइम डॉक्टोरल फेलोशिप के लिए शोध प्रस्ताव का चयन जीयाराम की महत्वपूर्ण अकादमिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह फेलोशिप उत्कृष्ट शोध प्रस्ताव के संदर्भ में दी जाती है, इससे शोध कार्य को नई दिशा मिलती है। जीयाराम का शोध राष्ट्र की उन्नति और प्रगति में सकारात्मक सहयोग करेगा।उनके शोध प्रस्ताव के स्वीकृत होने पर विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रक्षा सिंह, विभाग के अन्य शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विश्वविद्यालय परिवार ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं तथा उनके सफल शोध कार्य की कामना की।

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget