18 स्वीकृत पद, सिर्फ 4 कर्मचारी ,12 रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा चार कर्मचारियों के भरोसेnarmadanewstimes. in
18 स्वीकृत पद, सिर्फ 4 कर्मचारी ,12 रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा चार कर्मचारियों के भरोसे
अपराध नियंत्रण के बड़े दायित्व के बीच जीआर पी अनूपपुर चौकी में भारी बल की कमी, पद बढ़ाने की उठी मांग
अनूपपुर। अनूपपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन स्थित जीआर पी चौकी में स्वीकृत बल की तुलना में बेहद कम कर्मचारियों की पदस्थापना के कारण रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चौकी के लिए कुल 18 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र 4 कर्मचारी ही पदस्थ हैं। ऐसे में करीब 18 स्वीकृत पदों की जिम्मेदारी महज चार कर्मचारियों के कंधों पर आ गई है।
जीआर पी चौकी में एक चौकी प्रभारी का पद स्वीकृत है और उस पर एक अधिकारी पदस्थ है। एक ए एसआई का पद स्वीकृत है और उस पर भी एक कर्मचारी पदस्थ है। वहीं चार स्वीकृत प्रधान आरक्षक पदों में एक भी प्रधान आरक्षक पदस्थ नहीं है। इसी प्रकार 12 स्वीकृत आरक्षक पदों में से मात्र दो आरक्षक ही वर्तमान में पदस्थ बताएं जा रहे हैं। इस तरह कुल 18 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ चार कर्मचारियों से चौकी का संचालन किया जा रहा है।
12 रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा का जिम्मा
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि इन चार कर्मचारियों के जिम्में केवल अनूपपुर रेलवे स्टेशन की सुरक्षा नहीं, बल्कि लगभग 12 रेलवे स्टेशनों के विस्तृत क्षेत्र में अपराध नियंत्रण, गश्त, शिकायतों पर कार्रवाई, अपराध पंजीबद्ध करने, विवेचना तथा कानून-व्यवस्था बनाएं रखने जैसे महत्वपूर्ण दायित्व हैं।
जीआर पी चौकी अनूपपुर के कार्यक्षेत्र में बिजुरी, कोतमा, हरद, मौहरी, वेंकटनगर, छुलहा, जैतहरी, निगौरा, धुरवासिन, बैहाटोला, अनूपपुर तथा शहडोल जिले की सीमा से पहले अमलाई रेलवे स्टेशन सहित विस्तृत रेलवे क्षेत्र आता है। यह क्षेत्र एक ओर छत्तीसगढ़ की सीमा से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर शहडोल जिले की सीमा तक फैला हुआ है।
रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा, चोरी, मारपीट, महिला एवं यात्री सुरक्षा से जुड़े मामले, दुर्घटनाएं, संदिग्ध गतिविधियां तथा अन्य रेल अपराधों की रोकथाम और मामलों की विवेचना का दायित्व जीआर पी पर होता है। ऐसे में इतने बड़े क्षेत्र को केवल चार कर्मचारियों के माध्यम से प्रभावी ढंग से संभालना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
अपराध नियंत्रण या महज औपचारिकता?
बल की भारी कमी के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि जब स्वीकृत 18 पदों में से केवल चार कर्मचारी ही उपलब्ध हैं, तो इतने बड़े क्षेत्र में नियमित गश्त, अपराध की रोकथाम, घटनास्थल पर तत्काल पहुंच और मामलों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध विवेचना किस प्रकार संभव हो पाएगी?
रेल यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय को महज प्रशासनिक कमी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि किसी स्टेशन पर एक साथ अपराध, दुर्घटना या कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई गंभीर घटना घटती है, तो सीमित बल के कारण तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध कराने में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।
एसपी जीआर पी जबलपुर से बल बढ़ाने की मांग
स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि एसपी जीआर पी जबलपुर सहित वरिष्ठ रेलवे पुलिस अधिकारियों को अनूपपुर जीआर पी चौकी की वास्तविक स्थिति का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए स्वीकृत पदों के अनुरूप पर्याप्त पुलिस बल की पदस्थापना करनी चाहिए।
रेलवे यात्रियों की सुरक्षा किसी भी स्थिति में केवल औपचारिक व्यवस्था बनकर नहीं रहनी चाहिए। अनूपपुर रेलवे स्टेशन सहित आसपास के सभी रेलवे स्टेशनों पर प्रभावी अपराध नियंत्रण के लिए पर्याप्त संख्या में प्रधान आरक्षक और आरक्षकों की तत्काल पदस्थापना आवश्यक है।
18 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल चार कर्मचारियों के भरोसे 12 रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था चलना स्वयं में गंभीर स्थिति है। अब देखना होगा कि जीआर पी के वरिष्ठ अधिकारी इस कमी को कब तक दूर करते हैं और रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।






