भारत ज्योति विद्यालय में दिव्यांग छात्रावास के बच्चों के साथ हर्षोल्लास एवं आत्मीयता से मनाई गई दीपावली
अनूपपुर। दीपावली केवल दीपों, रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रेम, सद्भाव, अपनत्व, समानता और मानवता का संदेश देने वाला पर्व भी है। इसी भावना को साकार करते हुए भारत ज्योति विद्यालय, अनूपपुर में 2 नवंबर को दीपावली का पावन पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह एवं उमंग के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दिव्यांग छात्रावास के बच्चों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया, ताकि वे भी विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ मिलकर त्योहार की खुशियों का अनुभव कर सकें और अपनेपन के साथ इस उत्सव का हिस्सा बनें।
विद्यालय के प्राचार्य फादर जी. अलेक्जेंडर के सानिध्य एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के बीच आपसी प्रेम, समानता, सहयोग, संवेदनशीलता और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करना था। कार्यक्रम में दिव्यांग छात्रावास से आए बच्चों का विद्यालय परिवार द्वारा अत्यंत आत्मीयता एवं गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। विद्यालय का वातावरण उत्साह, उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीपों की पावन ज्योति ने अंधकार पर प्रकाश की विजय के साथ-साथ सभी के जीवन में ज्ञान, आशा और खुशियों का संदेश दिया। इसके पश्चात प्रार्थना गीत, मनमोहक नृत्य एवं संगीत की आकर्षक प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी सुंदर एवं यादगार बना दिया। बच्चों की प्रतिभा, उत्साह और मुस्कान ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया।
इस आयोजन का सबसे विशेष एवं भावुक क्षण वह था, जब भारत ज्योति विद्यालय और दिव्यांग छात्रावास के बच्चे सभी भेदभावों से ऊपर उठकर एक परिवार की तरह एक साथ दीपावली मनाते नजर आए। बच्चों ने एक-दूसरे के साथ खुशियाँ साझा कीं, पटाखे फोड़े और दीपावली के उत्सव का भरपूर आनंद लिया। उनके चेहरों पर खिलती मुस्कान और आँखों में दिखाई देने वाली खुशी इस बात का प्रमाण थी कि सच्चा आनंद दूसरों के साथ खुशियाँ बाँटने में ही निहित है।
इस अवसर पर विद्यालय की ओर से दिव्यांग छात्रावास के बच्चों को उपहार भेंट किए गए, जिससे उनके उत्साह और प्रसन्नता में और वृद्धि हुई। उपहार पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बनता था। इसके पश्चात सभी बच्चों ने एक साथ बैठकर स्नेहपूर्वक दोपहर का भोजन किया। साथ बैठकर भोजन करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि समानता, आत्मीयता और आपसी जुड़ाव का सुंदर प्रतीक बना।
इस कार्यक्रम का महत्व केवल दीपावली मनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बच्चों को जीवन का एक महत्वपूर्ण सामाजिक और मानवीय संदेश भी दिया। दिव्यांगता किसी व्यक्ति की प्रतिभा, क्षमता, सम्मान या खुशियाँ अनुभव करने के अधिकार को कम नहीं करती। समाज का प्रत्येक बच्चा समान प्रेम, सम्मान, अवसर और अपनत्व का अधिकारी है। ऐसे आयोजन बच्चों के मन से भेदभाव की भावना को दूर कर उनमें एक-दूसरे के प्रति सम्मान, सहयोग और संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यालय के विद्यार्थियों को भी इस आयोजन के माध्यम से यह सीख मिली कि हमें किसी व्यक्ति को उसकी शारीरिक स्थिति या क्षमताओं के आधार पर नहीं, बल्कि एक इंसान के रूप में देखना चाहिए। किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना, किसी को अपनापन देना और किसी की खुशियों में सहभागी बनना ही सच्ची सेवा और मानवीयता है। इस प्रकार के सामूहिक आयोजन बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी, करुणा, सहानुभूति और समावेशी सोच विकसित करने का सशक्त माध्यम बनते हैं।
फादर जी. अलेक्जेंडर के मार्गदर्शन में आयोजित यह समारोह सभी के लिए अविस्मरणीय बन गया। इस अवसर ने यह सुंदर संदेश दिया कि त्योहारों की सार्थकता तभी है, जब उनकी खुशियों में समाज का प्रत्येक व्यक्ति सहभागी बने। वास्तव में, भारत ज्योति विद्यालय की यह दीपावली केवल दीपों और आतिशबाजी का उत्सव नहीं रही, बल्कि प्रेम, समानता, संवेदनशीलता, मानवता और आपसी अपनत्व के दीप जलाने का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई।