प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय तुलसी महाविद्यालय अनूपपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का सफल आयोजनnarmadanewstimes. in
प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय तुलसी महाविद्यालय अनूपपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का सफल आयोजन
अनूपपुर ।प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय तुलसी महाविद्यालय अनूपपुर में “जैव विविधता की स्थिति एवं संरक्षण नीतियों में नवीन रुझान” विषय पर 6 फरवरी - 7 फरवरी 2026 को,दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती के प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ । संगीत साधक ऋषिराज सिंह के संगीत संयोजन में स्वागत गीत की प्रस्तुति की गई । राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का सफल संचालन डॉ. नीरज श्रीवास्तव विभाग अध्यक्ष हिंदी द्वारा किया गया। प्रधानमंत्री कॉलेज आफ एक्सीलेंस शासकीय तुलसी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर अनिल कुमार सक्सेना ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों स्वागत करते इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त किया कि भारतवर्ष के विभिन्न प्रांतों से आधिकारिक संख्या में पधार कर, इस दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी को सफल बनाया । राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी की संयोजक डॉ राधा सिंह विभाग अध्यक्ष वनस्पति शास्त्र में सभी अतिथियों का विस्तार पूर्वक परिचय कराया। सेमिनार का उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन, तथा संरक्षण नीतियों में हो रहे नवीन परिवर्तनों एवं शोध-आधारित दृष्टिकोणों पर गंभीर विमर्श करना था।
सेमिनार में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए विषय-विशेषज्ञों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि पं. शंभू नाथ शुक्ल विश्वविद्यालय के कुल गुरु प्रो. रामशंकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि जैव विविधता का संरक्षण मानव जीवन और भविष्य की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ विषय है। संरक्षण नीतियों में नवीन रुझानों, तकनीकी नवाचारों तथा शोध आधारित समाधानों को अपनाकर ही पर्यावरणीय संकट का समाधान संभव है। विशिष्ट वक्ताओं में रमाकांत पाण्डेय (प्रो. बीआईटी पटना), डॉ. नेतराम कौरव( सहा. प्रा. शासकीय होल्कर साइंस महाविद्यालय), डॉ. देवेन्द्र कुमार पटेल(प्रो. गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर), डॉ अवधेश कुमार श्रीवास्तव (प्रो. शा.डीटीपीजी कॉलेज दुर्ग), आदित्य अभिनव डॉक्टर क श्रीवास्तव (विभाग अध्यक्ष हिंदी, भवंस, मेहता महाविद्यालय कोशांबी, उत्तर प्रदेश) ने जैव विविधता के वर्तमान संकट, जलवायु परिवर्तन, मानव गतिविधियों के प्रभाव, तथा संरक्षण रणनीतियों की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें जैव विविधता के घटते स्तर, जनजातीय क्षेत्रों की जैव विविधता, सतत विकास एवं नीति-निर्माण जैसे विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
समापन सत्र में विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. आशीष तिवारी की मुख्य अतिथि के रूप में गरिमामई उपस्थिति रही। कुलसचिव महोदय ने सेमिनार के सफल आयोजन की सराहना करते हुए आयोजक समिति को शुभकामनाएँ दीं तथा ऐसे अकादमिक कार्यक्रमों को पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। समापन सत्र में महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संरक्षक प्रो. अनिल कुमार सक्सेना ने अपने उद्बोधन में कहा कि दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार अत्यंत सार्थक एवं ज्ञानवर्धक रहा, इस सेमिनार के माध्यम से देश के विभिन्न भागों से आए विद्वानों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को जैव विविधता संरक्षण के विविध आयामों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्राप्त हुआ।
समापन सत्र में सेमिनार की रिपोर्ट आयोजन सचिव डॉ. राधा सिंह, सहायक प्राध्यापक वनस्पति शास्त्र द्वारा प्रस्तुत की गई तथा विशिष्ठ अतिथिओं के द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। महाविद्यालय प्रशासन ने सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों तथा समस्त सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर यह संकल्प भी लिया गया कि जैव विविधता संरक्षण हेतु जागरूकता एवं शोध कार्यों को निरंतर प्रोत्साहित किया जाएगा।









