नगर के विकास में बना रोडा-अध्यक्ष,पार्षद
अनूपपुर/नगर की स्वच्छता, सड़क ,नाली आदि के विकास हेतु नगर पालिका की जिम्मेदारी होती है। अध्यक्ष ,पार्षद का चुनाव इसी लिए किया जाता है ,लेकिन जब राजनीति के दाव पेंच में अध्यक्ष का चुनाव जनता के द्वारा ना होकर पार्षदों द्वारा किया जाता है जिसका नतीजा इन दिनों अनूपपुर के नगर पालिका में देखने व सुनने को मिल जाता हैं ,वहीं अध्यक्ष अपनी कुर्सी को लेकर काफी चिंतित हैं। दूसरी ओर पार्षद भी अध्यक्ष के खिलाफ बिगुल बजा चुके हैं। अब मैदान में कूदने सही वक्त के इंतजार में हैं यही वजह हैं कि अध्यक्ष स्वतंत्र रूप से विकास हेतु कार्यों में निर्णय ले पाने में अक्षम साबित हो रही हैं। तो दूसरी ओर वार्ड की जनता अपने पार्षद से नाराज हैं ,क्योंकि वार्ड की जनता अपने-अपने वार्ड से पार्षद चुनकर भेजती हैं कि वार्ड की साफ -सफाई व नाली ,सड़क आदि कि सुविधा प्राप्त हो पाएगी लेकिन पार्षद और अध्यक्ष के बीच ताल मेल न बैठने के कारण पार्षद भी उसी तरह साबित हो रहे हैं जिस तरह एक बच्चा बिन मां बाप का हो जाता हैं।
*पार्षद का कहना है कि* -
इन दिनों नगर विकास हेतु जो भी कार्य किए जाते हैं वह सब ऑनलाइन टेंडर होता हैं और अधिकांश कार्य बाहरी ठेकेदार द्वारा टेंडर लिया जाता हैं। ठेकेदार द्वारा कार्य कराने वक्त पार्षद को सूचना देना भी उचित नहीं समझता और ना ही परिषद द्वारा सूचना दी जाती है यही कारण है कि पार्षदों को फूटी कौड़ी का भी आश नहीं और तो और हमारे द्वारा गुणवत्ता पर ऑन पेपर शिकायत करने पर भी अध्यक्ष द्वारा बिल पास कर दिया जाता है , इसी कारण वार्डवासी की नजरों में पार्षद ही बली का बकरा साबित होता है।
*नगर विकास की आश*
अनूपपुर की जनता सामतपुर की गली एवं बस्ती से निकल कर जिला की सड़कों पर अपनी निगाहें डालती हैं, उस वक्त दूर-दूर तक जिला का स्वरूप नजर ही नहीं आता , वहीं न तो टैक्सी स्टैंड, काम्प्लेक्स और न ही बस स्टैंड। इन सबसे बड़ी गंभीर समस्या फ्लाई ओवर ब्रिज न जाने और कितना वर्ष लगेगा इस पर कोई भी जवाबदार नेता मंत्री या फिर प्रशासनिक अमला जवाब देने में अक्षम हैं, वहीं एक नजर स्वास्थ्य विभाग पर डालें तो वह भी भगवान भरोसे ही चल रहा है , वह तो सिर्फ दो-तीन डॉक्टरों की मेहरबानी है कि आम जनता स्वास्थ्य लाभ लेने जिला अस्पताल में पहुंच जाती है ,जिस दिन ये तीनों डॉक्टरों का ट्रांसफर हुआ उस दिन करोड़ों की इमारत कहीं ताज महल में तब्दील न हो जाए।

