**रेलवे स्टेशन रोड पर स्थित दुकानों के अतिक्रमण को हटाए जाने की कार्रवाई की गई





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**यातायात,कोतवाली पुलिस  और नगर पालिका की सयुक्त कार्यवाही**

थाना तिराहा से रेलवे स्टेशन तिराहा तक मार्ग 

के दोनों ओर स्थित दुकान संचालकों द्वारा दुकान का सामान रोड पर फैलाकर यातायात बाधित किया जा रहा था। जिससे रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले आम नागरिकों को ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ रहा था।  आज संयुक्त कार्रवाई द्वारा रोड पर फैले सामान को हटवाया गया। साथ ही पांच दुकान संचालकों  के विरुद्ध इस्तगासा तैयार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश होने हेतु बताया गया।

सभी दुकान संचालकों को समझाइश दी गई की दुकान का सामान दुकान तक सीमित रखें उसे फुटपाथ पर फैलाकर यातायात अवरुद्ध न करें,आगे इस प्रकार की स्थिति मिलने पर सामान जप्त करने  की कार्रवाई की जाएगी।

कार्यवाही में थाना यातायात से निरीक्षक ज्योति दुबे, प्रधान आरक्षक जितेंद्र नरवरिया आरक्षक महेश गुर्जर एवं दिलीप सिंह, थाना कोतवाली से सहायक उप निरीक्षक संतोष वर्मा ,आरक्षक प्रवीण भगत, आरक्षक कमलेश,

नगरपालिका से आर. आई. गौरव सिंह बघेल द्वारा कार्यवाही की गई।

 पर्यूषण पर्व के समापन पर जैन समाज ने निकाली भव्य शोभायात्रा ।


अमरकंटक 

अंजय तिवारी

अमरकंटक मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में स्थानीय दिगंबर जैन सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी अमरकंटक द्वारा पर्यूषण पर्व के समापन अवसर पर भगवान आदिनाथ जी का भाव एवं विशाल शोभायात्रा निकली। विशाल भव्य शोभा यात्रा की विशेषता यह रही की इस बार अन्य वर्षो से हटकर धार्मिक आस्था विश्वास के प्रतीक भगवान श्री राम लक्ष्मण जानकी सहित पवनसुत हनुमान जी के आकर्षक झांकी भी इस बार शामिल रही वहीं दूसरी ओर शोभायात्रा में राष्ट्रभक्ति देश प्रेम शौर्य अदम्य  साहस का समावेश करते हुए महारानी लक्ष्मीबाई को भी झांकी में सम्मिलित किया गया दोनों ही झांकी आकर्षण का केंद्र बिंदु रहे। विशाल मनोहरी शोभा यात्रा मैं जैन समाज के युवक युवती महिलाएं नागरिक आकर्षक बैंड धुन के साथ नाचते गाते समाज के नारे लगाते हुए ध्वज लेकर चल रहे थे शोभा यात्रा के दौरान भगवान आदिनाथ, परम पूज्य संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज ,आचार्य समय सागर जी महाराज का जय घोष एवं धार्मिक भजन गाते हुए चले । जैन समाज के द्वारा निकाले गए भगवान आदिनाथ के विशाल शोभायात्रा में क्षेत्रीय विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को , जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष संतोष पांडे, स्थानीय नगर परिषद अध्यक्ष पार्वती सिंह पार्षद निधि जैन, सुनील जैन ,बाबा देवेंद्र जैन ,चुन्नू राकेश जैन, निलेश जैन, प्रशांत जैन, पंकज जैन ,श्यामलाल सेन, हरि सिंह, सुशील  ,सोनू जैन ,महेश जैन, दया जैन ,रामगोपाल द्विवेदी, पत्रकारगण धनंजय तिवारी, श्रवण उपाध्याय, सोमू दुबे आदि सभी शामिल रहे उसके पूर्व जैन मंदिर परिसर में सभी आगंतुक जनों को भोजन कराया गया।


सफाई मित्र सुरक्षा शिविर का हुआ उद्घाटन


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अमरकंटक । स्वच्छता ही सेवा 2024 (स्वभाव स्वच्छता,  संस्कार स्वच्छता )कैंपेन 4.0 के अंतर्गत आज सफाई मित्र सुरक्षा शिविर का उद्घाटन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र पर मुख्य अतिथि  कुलपति प्रोफेसर श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में  मंडल की अध्यक्ष श्रीमती शीला त्रिपाठी के द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि महोदय ने बताया कि सफाई करना एक मानवीय गुण होता है इसलिए इन मानवीय गुण का सम्मान किया जाना चाहिए, और यही भाव उनके लिए सदैव रखना चाहिए। सभी को उनके  अनुसरण करते हुए अपने अपने आसपास की  वातावरण को स्वच्छ रखना चाहिए। सफाई मित्रों को  प्रधानमंत्री की जो भी देश में योजनाएं चल रही है सभी को विस्तार से से बताया गया।  कुलपति एवं विशिष्ट अतिथि के द्वारा सफाई मित्रों को हैंड वॉश सैनिटाइजर फेस मस्क हैंड ग्लव्स आदि सामानों का वितरण किया गया। सफाई मित्रों का स्वागत  विश्वविद्यालय के कुल सचिव द्वारा एवं  कार्यक्रम का संचालन डुप्टी रजिस्टर डॉक्टर संजीव सिंह द्वारा किया गया।

मुख्य अतिथि एवं विशेष अतिथि का स्वागत एनएसएस संयोजक डॉ मनोज पांडे एवं एनसीसी के ANO डॉक्टर जितेंद्र सिंह द्वारा किया गया। कुल सचिव का स्वागत कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर जयप्रकाश नारायण द्वारा किया गया। सफाई मित्रों के साथ मान्य कुलपति, विशिष्ट अतिथि एवं कुल सचिव के साथ फोटोग्राफी किया गया।इस अवसर पर डॉ अखिलेश कुमार सिंह, कार्यक्रम अधिकारी डॉ राहुल कुमार यादव, डॉक्टर कुंज बिहारी मिश्रा, डॉक्टर आलोक कुमार सिंह ,प्रोफेसर दिनेश चौधरी, नर्सिंग विभाग से डॉक्टर मालती लोधी ,डॉक्टर अनचून, डॉक्टर देवनारायण, डॉक्टर पंकज तिवारी, डॉक्टर गुप्ता सर , रत्नेश श्रीवास्तव, अंकुर गौतम, गौरव सिंह बघेल,  अनिल टांडिया एवं सफाई मित्र, एनएसएस के दल नायक गण एवं स्वयंसेवक एनसीसी के कैडेट्स शारीरिक शिक्षा के  विद्यार्थी सहित विश्वविद्यालय के कर्मचारी एवं अधिकारी उपस्थित थे।

आज ही निशुल्क दंत परीक्षण शिविर का भी आयोजन विश्वविद्यालय के सफाई मित्रों एवं उनके परिवार, प्राध्यापक एवं उनके परिवार, कर्मचारियों एवं उनके परिवार एवं छात्र-छात्राओं के लिए किया गया। दंत परीक्षण डॉक्टर मेघा साहू( बीडीएस, एमडीएस) के नेतृत्व में उनकी टीम के द्वारा किया गया ,इसके पूर्व डॉक्टर मेघा साहू मैडम का स्वागत विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉक्टर शिवांक मनी त्रिपाठी द्वारा किया गया। दंत परीक्षण में 100 से अधिक लोगों का निशुल्क दंत परीक्षण किया गया। दंत परीक्षण शिविर का उद्घाटन विश्वविद्यालय के मुखिया कुलपति  श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी द्वारा फीता काट के किया गया। इस अवसर पर समस्त विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी एवं अधिकारी उपस्थित थें।

 *सोडा फैक्ट्री के गैस रिसाव से प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य का हाल-चाल जानने शहडोल मेडिकल कॉलेज पहुंचें कलेक्टर



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अनूपपुर । 22 सितंबर 2024 जिले के नगर परिषद बरगवां/अमलाई क्षेत्र स्थित सोडा फैक्ट्री में गैस रिसाव से प्रभावित हुए लोगों के स्वास्थ्य का हाल जानने कलेक्टर  हर्षल पंचोली ने मेडिकल कॉलेज शहडोल पहुंचकर भर्ती प्रभावितों का हाल जाना, भर्ती प्रभावित लोगों से उन्होंने चर्चा करते हुए उनके स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान अनूपपुर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक उपस्थित थे। कलेक्टर ने मेडिकल कॉलेज के अमले से भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त की, चिकित्सको ने जानकारी दी कि मरीजों की स्थिति सामान्य है। कलेक्टर ने चिकित्सकीय अमले को मरीजों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

 *सोडा फैक्ट्री में क्लोरीन गैस का रिसाव: सुरक्षा प्रबंधन में लापरवाही का नतीजा*,*चैतन्य मिश्रा


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*भोपाल गैस त्रासदी की भयावहता की याद दिलाती अनूपपुर की सोडा कास्टिक यूनिट बरगवां, एक बड़े खतरे की ओर इशारा*

अनूपपुर । जिले  के नगर परिषद् बरगवां अमलाई  स्थित सोडा कास्टिक यूनिट से हुए क्लोरीन गैस के रिसाव की घटना ने न केवल औद्योगिक सुरक्षा के मुद्दे को उजागर किया है, बल्कि स्थानीय निवासियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति प्रबंधन और प्रशासन की उदासीनता को भी सामने लाया है। क्लोरीन गैस का रिसाव, जो कि एक अत्यंत खतरनाक और जानलेवा गैस है, लोगों की जान को सीधे तौर पर खतरे में डालता है। यह विचार प्रकट करते हुए विचारक चैतन्य मिश्रा ने आगे कहा कि यह पहली बार नहीं हुआ जब इस यूनिट से गैस का रिसाव हुआ है; यह नियमित रूप से होने वाली घटनाओं में शामिल हो गया है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।क्लोरीन एक जहरीली गैस है, और इसके संपर्क में आने से सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, और त्वचा में जलन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। लंबे समय तक इसका प्रभाव स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। दिनांक 21 सितंबर 2024 को शाम करीब 7:30 बजे अचानक गैस का रिसाव हुआ, जिससे परिषद् के वार्ड  नंबर 03 की आबादी में भगदड़ मच गई। लोगों की आंखों से आंसू बहने लगे, और सांस लेने में कठिनाई होने लगी। यह घटना बेहद खतरनाक थी और इसका प्रभाव कई घंटे तक जमीन की सतह पर बना रहा।सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह कोई एक बार की घटना नहीं है, बल्कि इस यूनिट से गैस का रिसाव दो एक  महीने में एकाध बार होता रहता है। इससे साफ है कि फैक्ट्री में सुरक्षा प्रबंधन में गंभीर लापरवाही है।  बरगवां अमलाई नगर परिषद के स्थानीय निवासी जो  वार्ड नंबर 1, 2 और 3 के लोग जो फैक्ट्री के आसपास रहते हैं ऐसे खतरों के बीच जीने को मजबूर हैं। और  हर बार इस रिसाव से परेशान हो जाते हैं, लेकिन उद्योग प्रशासन द्वारा इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उद्योग के अधिकारियों की चुप्पी और लापरवाही निंदनीय है, जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि वे स्थानीय रहवासियों  की सुरक्षा और स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर रहे हैं।सबसे बड़ी समस्या यह है कि फैक्ट्री के पास कोई उचित स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं है। सोडा फैक्ट्री के स्वास्थ्य केंद्र में न डॉक्टर हैं और न ही दवाइयां। अगर कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसका इलाज और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराना संभव नहीं है। ऐसे में फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वे इस ओर ध्यान दें और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाएं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में लोगों की जान बचाई जा सके।इस तरह की घटनाएं हमें भोपाल गैस त्रासदी की भयावहता की याद दिलाती हैं, जब प्रबंधन की लापरवाही और प्रशासन की उदासीनता के चलते हजारों लोग अपनी जान गंवा बैठे थे। अनूपपुर  की यह घटना भी एक बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही है। अगर समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यहां भी स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।इस तरह के औद्योगिक हादसों से बचने के लिए जरूरी है कि फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन एक साथ मिलकर सुरक्षा के ठोस उपाय करें। क्लोरीन गैस जैसी खतरनाक गैस के रिसाव की घटनाओं को बार-बार होने देना न केवल लापरवाही है, बल्कि एक गंभीर अपराध भी है। स्थानीय प्रशासन और उद्योग विभाग को इस ओर ध्यान देकर नियमित निरीक्षण करना चाहिए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही, स्वास्थ्य सुविधाओं को भी सुधारना चाहिए ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में स्थानीय निवासियों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके।क्लोरीन गैस का रिसाव केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं है, यह मानव जीवन के प्रति लापरवाही का प्रतीक है, जिसे किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।यदि प्रशासन और प्रबंधन समय रहते नहीं चेते, तो अनूपपुर  की यह सोडा फैक्ट्री अगली बड़ी औद्योगिक त्रासदी का केंद्र बन सकती है।

 जिला समन्वयक उमेश पांडेय के खिलाफ कलेक्टर से हुई शिकायत गरीब आदिवासियों को भी इस भृष्टाचारी ने नहीं बक्सा,15 हजार न देना पड़ा भारी,मान गया सम्मान गया,गई आदिवासी की नौकरी


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 विजय उरमलिया की कलम से

अनूपपुर । जिला कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर कमरा नंबर 25 से जिले की   भृष्टाचार कथा लिखने का काम किया जा रहा है यहां मौजूद जिला समन्वयक के शिकायतों का दौर शुरू हो गया जैसे ही हमने इनके काले करतूतों की कहानी लिखनी शुरू की पीड़ितों को शायद हिम्मत बंधी और अब इसके दुर्व्यवहार,भृष्टाचार की कहानियां एक एक कर सामने आने लगी है, दरअसल जमुडी निवासी राकेश सिंह गोंड ने अनूपपुर कलेक्टर से लिखित शिकायत करते हुए जिला समन्वयक उमेश पांडेय के खिलाफ कार्यवाही करते हुए जिले से  बाहर भेजे जाने की शिकायत की गई और शिकायत में गंभीर आरोप उमेश पांडेय पर लगाये हैं,विभागीय भृष्टाचार तो ऐसे लगता है जैसे इनकी अपनी जागीर है जब चाहे जहां चाहे जैसे चाहे ये साहब भृष्टाचार को अंजाम दे इनका मन जब विभागीय भृष्टाचार से नहीं भरा तो विभाग में काम करने वाले बेचारे गरीबों से भी पैसों की मांग कर डाली और जब गरीब ने पंद्रह हजार नही दिए तो उसको निकाल बाहर फेंका और ये कोई पहला मामला नहीं है जिसने पैसा दिया जिसने उमेश पांडेय की चाटुकारिता की वही रहेगा अन्यथा उसका जन अभियान परिषद में नौकरी तो दूर की कौड़ी हैं,और यही कुछ हश्र हुआ जमुडी निवासी राकेश सिंह गोंड के साथ जहां उसने कलेक्टर से की गई शिकायत में साफ- साफ लिखा कि मैं जमुडी में परामर्शदाता के रूप में कार्य कर रहा था जिला समन्वयक उमेश पांडेय के द्वारा बिना किसी नोटिस या बिना कोई कारण बताए मुझे बाहर कर दिया गया,और जब मैंने इसकी वजह जाननी चाही तो साहब ने पंद्रह हजार की मांग मेरे सामने रख दी और जब मैं व्यवस्था नहीं कर सका तो मुझे बाहर कर दिया गया,अब प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव बताइये की उनकी सरकार किनके भरोसे आदिवासियों,गरीबों, पिछड़ों के साथ खड़े होने का दंभ भरते है चूंकि जब इनके अधिकारी कर्मचारी इन्ही आदिवासियों,सोशितों, पीड़ितों का खून चूसने से बाज नहीं आ रहे तो सरकार किस हक से इनके हितैषी होने का दंभ भरती है,हम अगले एपिसोड में उस नेता के बारे में भी विस्तृत जानकारी देंगे जिसके पालने में पलने का गुमान उमेश पांडेय जैसे भृष्ट कर्मचारी को हैं ,भृष्टाचार में आकंठ तक डूबे उमेश पांडेय को आखिर कलेक्टर अनूपपुर किस बात के लिए अभय दान दिए हुए है,सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जन अभियान परिषद की  नर्मदा यात्रा की एक फाइल जो कलेक्टर कार्यालय में कई सालों तक लंबित रही जिसका भुगतान कलेक्टर को करना था समझदार कलेक्टरों ने करना मुनासिब नहीं समझा उसका नतीजा ये हुआ कि सत्ता की कुर्सी में विराजमान भाजपा के कुछ नेताओं ने उन कलेक्टर साहब की रवानगी करवा दी,और एक कलेक्टर साहब पर राजनैतिक दबाव बनवा कर उस अनैतिक भुगतान को करवाया गया जिस के दस्तावेजों के लिए हमारी टीम लगी हुई है कि आखिर नर्मदा यात्रा के कौन से वो भुगतान थे जो करवाये गये और भी कई भृष्टाचारों की परत दर परत हम खोलेंगे ही पर जिला समन्वयक जन अभियान परिषद का अगर जिले से विदाई करते हुए जांच कर कार्यवाही नहीं की गई तो जिले को दीमग की तरह खोखला करने में  ये महोदय कोई कोर कसर नहीं छोड़़ने वाला।

 *योग, परामर्श तथा मेडिकल सुविधाओं से मानसिक विकारों का समाधान संभव - डॉ. श्रुति


अमरकंटक । इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के मनोविज्ञान विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में युवाओं में तनाव के समाधान हेतु मानसिक तनाव समाधान शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के  कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने सभी युवाओं एवं जनसमुदाय के मानसिक स्वास्थ्य तथा कल्याण के लिए अपना आशीर्वचन प्रदान किया l कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, छात्र-कल्याण प्रो. अजय बाघ ने उद्बोधन देते हुए कहा कि  हमें यह समझना होगा की जब हम अपने विचारों का प्रदर्शन करते हैं, तो वो या तो सक्रिय रूप से अथवा निष्क्रिय रूप से प्रदर्शित होता हैl मन में चल रहे हमारे विचार हमारे शरीर को प्रभावित करता है। हमारे विचार तमाम तरीके के पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होता है, जिससे तनाव की उत्पत्ति होती। ये तनाव या तो यूं स्ट्रेस के रूप में होते हैं, जिसे गुड़ स्ट्रेस कहा जाता है और दूसरा डिस्ट्रेस के रूप में होता है, जिसे बैड स्ट्रेस कहा जाता है।  अत्यधिक डिस्ट्रेस व्यक्ति के लिए हानिकारक होता है। तीन स्थितियां व्यक्ति में तनाव को जन्म देती हैं- प्रथम व्यक्ति जब यह मान लेता है कि ऐसा होने वाला है, दूसरा जब अतिशय चिंतित रहता है तथा तीसरा  कुसमा योजित तरीके के व्यवहारिक कार्यों को अपनाता है। वस्तुतः किसी भी व्यक्ति के उत्तम निष्पादन के लिए मध्यम स्तर के तनाव का होना अत्यधिक जरूरी होता है, तथापि अत्यधिक तनावपूर्ण परिस्थितियों का समाधान सक्रिय तथा समायोजित व्यवहारिक व्यापदेशों के माध्यम से किया जा सकता है। वास्तव में कल कभी मरता नहीं तथा सफलता और असफलता जीवन के एक अंग है, इस विचार को मस्तिष्क में सदैव जीवित रखना चाहिए।

 कुष्ठ चिकित्साधिकारी, अनूपपुर डॉ. शिवेंद्र द्विवेदी ने ‘तनाव प्रबंधन’ विषय पर उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए यह कहा की तकनीकी ज्ञान हमारे सफलता के मार्ग में एक सहायक की भूमिका प्रस्तुत कर रहा है, तो वहीं इसका अतिशय उपयोग आपसी संबंधों को कमजोर कर रहा है जो व्यक्तिगत रूप से मानसिक तनावों को भी जन्म देता है। सरकार द्वारा मानसिक बीमारियों से निपटने के लिए कई वेलनेस एक्टिविटी यथा; प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य केंद्र, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यकम इत्यादि संचालित हो रहे हैं। इसलिए लोगों को जागरूक होकर मेडिकल सुविधाओं का अधिकाधिक लाभ उठाना चाहिए । अपने उद्बोधन के उपरान्त डॉ. द्विवेदी ने मनहित ऐप के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक विकारों की पहचान करना और मनोचिकित्सक की  पहुंच को सुगम बनाने हेतु प्रेरित किया।

अनूपपुर जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. श्रुति  सिंह ने  विस्तृत रूप से ‘मानसिक स्वास्थ्य तथा तनाव प्रबंधन’ पर चर्चा करते हुए विभिन्न मानसिक विकारों को उद्धृत करते हुए यह कहा की स्वास्थ्य पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति है । जब व्यक्ति जीवन जीने के क्रम में तमाम व्यक्तिगत तथा परिस्थितिगत श्रोतों से नकारात्मक तरीके से प्रभावित होता तो मानसिक विकारों का जन्म होता है, जिसमें तनाव, चिंता, सोशल स्टिंग मां, डिप्रेशन, ड्रग एडिक्शन, मनोविदलिता इत्यादि प्रमुख है, जिसकी परिणति क्रोध, नीद न आना, हाथ पाव फूलना, पसीने आना, बेचैनी, घबराहट, चिंतित रहना से ले कर आत्महत्या जैसी स्थिति प्रदर्शित होती है। डॉ. श्रुति ने मानसिक समस्या के कारण और निवारण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे लक्षणों को चिन्हित कर कई निवारण साधनों का सहारा लिया जा सकता है यथा: सही योग प्रशिक्षकों की सहायता से योग की क्रियाविधि तथा मेडिटेशन को अपनाना, किसी व्यक्ति को ब्लेम न करना, मानसिक बीमारियों की समझ रखना, मनोचिकित्सक से परामर्श लेना तथा मेडिकल सुविधाओं का तुरंत लाभ उठाना। 

कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत मंचासीन अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन तथा पुष्पार्चन कर किया गया। मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. ललित कुमार मिश्र ने विषय प्रवर्तन तथा अतिथियों के प्रति स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया साथ ही साथ विभागीय शिक्षकों के साथ पुष्पगुच्छ एवं श्रीफल दे कर अतिथियों का  स्वागत किया।  विश्वविद्यालय के चिकित्साधिकारी डॉ. शिवांक मणि त्रिपाठी ने  सभी अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापन किया तथा कार्यक्रम का सफल संचालन मनोविज्ञान विभाग की शोध छात्रा श्रीमती प्रज्ञा मिश्रा ने किया। इस अवसर पर उप दंत चिकित्सक डॉ. प्रीति साहू, उप-कुलसचिव डॉ. संजीव सिंह, राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. मनोज पाण्डेय, एन. सी. सी. के ए.एन.ओ. डॉ. जीतेन्द्र सिंह, प्रो. विष्णु नारायण मिश्र, डॉ. सुशील कुमार सिंह, डॉ. हरे राम पाण्डेय, डॉ. विनय यादव , डॉ. आलोक, डॉ. राकेश, डॉ. प्रवीन गुप्ता, डॉ. सपना, डॉ. श्याम सुन्दर पाल सहित बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे ।

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