*पीढ़ियों के बीच संवाद ही सशक्त समाज की आधारशिला : प्रो. सक्सेना
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अनूपपुर। 06 अप्रैल 2026
प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय तुलसी महाविद्यालय, अनूपपुर में इंटरजेनेरेशनल बॉन्डिंग विषय पर एक संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के समाज कार्य विभाग के सहयोग से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में अमरकंटक विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय फुकन, डॉ. रमेश बी. तथा योग विभाग के प्राध्यापक डॉ. श्यामसुंदर पाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ विश्वविद्यालय के शोधार्थी एवं विद्यार्थी भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी को कम करना अत्यंत आवश्यक है। इंटरजेनेरेशन बॉन्डिंग के माध्यम से हम पारिवारिक एवं सामाजिक मूल्यों को पुनर्स्थापित कर सकते हैं। युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के बीच संवाद एवं अनुभवों का आदान-प्रदान ही सशक्त समाज की आधारशिला है।
इस अवसर पर डॉ. दिग्विजय फुकन ने अपने वक्तव्य में कहा कि समाज की सतत प्रगति के लिए आवश्यक है कि विभिन्न पीढ़ियाँ एक-दूसरे के अनुभवों और दृष्टिकोणों को समझें। वृद्धों के जीवनानुभव और युवाओं की ऊर्जा का समन्वय समाज को नई दिशा प्रदान करता है।
डॉ. रमेश बी. ने सामाजिक संरचना में परिवार की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पीढ़ियों के बीच सतत संवाद समाज की स्थिरता के लिए आवश्यक है।
योग विभाग के प्राध्यापक डॉ. श्यामसुंदर पाल ने योग एवं भारतीय जीवन पद्धति के माध्यम से पीढ़ियों के मध्य समन्वय स्थापित करने पर बल दिया।
वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. जे. के. संत ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक तकनीकी युग में मानवीय संबंधों में बढ़ती दूरी को कम करने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं, जो सामाजिक मूल्यों को पुनर्जीवित करते हैं।
इस अवसर पर डॉ. राधा सिंह एवं अन्य प्राध्यापकगण भी उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का आयोजन शासकीय तुलसी महाविद्यालय, अनूपपुर के समाजशास्त्र विभाग तथा अमरकंटक विश्वविद्यालय के समाजकार्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. ज्ञान प्रकाश पाण्डेय, सहायक प्राध्यापक (समाजशास्त्र) रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. नीरज श्रीवास्तव, प्रो. विनोद कुमार कोल, प्रो. शाहबाज खान, डॉ. नंदलाल गुप्ता, डॉ. तरन्नुम सरवत सहित अन्य प्राध्यापकों का विशेष सहयोग रहा।



