अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि / नाटककार विलियम शेक्सपियर ( 26 अप्रैल 1564 - 23 अप्रैल 1616 )के प्रसिद्ध नाटक " रोमियो और जूलियट "का डायलॉग 'नाम में क्या रखा है '.......?
उक्त डायलॉग के वास्तविक स्वरूप को लगभग 400 सालों बाद पलट दिया शहडोल के पावन धरा पर 18 दिसम्बर 1903 को जन्में शहडोल जिले के निर्माता, विंध्य प्रदेश के प्रथम और निर्विरोध मुख्यमंत्री (1952 से 31 अक्टूबर1956 तक )और मध्यप्रदेश सरकार मे 1956 से 1976 तक निरंतर वन,नैसर्गिक साधन, सिंचाई, सहकारिता, शिक्षा, लोकनिर्माण और वित्त मंत्रालय जैसे मंत्रालय को सम्हालने वाले पंडित शंभूनाथ शुक्ला जी ने।
01 नवंबर 1956 को मध्यप्रदेश बनने के बाद रीवा जिले में सिरमौर स्थित भारत का 23 वां सबसे ऊंचा जल प्रपात जो कि तमस नदी की उप-नदी बीहड़ नदी पर स्थिति है में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट का प्रपोजल राज्य शासन के पास विचाराधीन था।
चचाई वीरान और चचाई आबाद नामक टोला मेडियारास गांव तहसील - सोहागपुर जिला - शहडोल के अंतर्गत आते थे ( वर्तमान में तहसील और जिला अनूपपुर ) इसी नाम का उपयोग करते हुए पंडित शंभूनाथ शुक्ला जी ने चचाई - पाली - स्टेशन चचाई नाम से अमरकंटक ताप विद्युत केन्द्र चचाई में 60 मेगावाट (30 ×2 प्रथम चरण) कोयला आधारित बिजलीघर की स्वीकृति दिलाई ।
1958 में पंडित शंभूनाथ शुक्ला जी के कर कमलों से भूमि पूजन हुआ और शुरुआती दिनों में बांध ( डैम ) का काम सुथना नाला के ऊपर मेडियारास में शुरू हुआ जो कि लगभग 400 एकड भूमि पर बना हुआ है।
पावर प्लांट( 30 × 2) का काम जर्मनी और आस्ट्रेलिया के सहयोग से 1960 में प्रारंभ हुआ जो कि ग्राम देवरी, मेडियारास और कैल्हौरी की भूमियों पर निर्मित किया गया है।
इसी पहाडी पर सर्वप्रथम सफेद शेर मोहन को महाराजा रीवा ने देखा ,जो कि बाद में भोलगढ के जंगलों में पकडा गया था। इसी पहाड़ी पर चचाई का उच्च विश्राम गृह बना है।
आवासीय परिसर का निर्माण ग्राम कैल्हौरी और ग्राम मेडियारास के चचाई आबाद ( DD Quarter ) में किया गया है।
कालान्तर में बिरसिंहपुर पाली जिला - शहडोल ( वर्तमान में जिला - उमरिया )में भी कोयला आधारित बिजलीघर प्रारंभ किया गया।
वर्ष 1964 मे अमरकंटक ताप विद्युत केंद्र (30 × 2 मेगावाट ) का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारिका प्रसाद मिश्र द्वारा किया गया था।
तत्पश्चात (120 × 2 द्वितीय चरण) मेगावाट का कार्य BHEL द्वारा प्रारंभ हुआ जो कि1977 में बनकर तैयार हुआ जिसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सकलेचा ने किया।
इसी के साथ उर्जा नगरी चचाई में देश के कोने - कोने से लोगों का आना शुरू हुआ और मिनी भारत का रूप चचाई ने धारण कर लिया।
नवंबर 1977 में प्रथम निर्मित 120 मेगावाट को BHEL द्वारा 13/01/2015 और मई 1978 मे द्वितीय निर्मित 120 मेगावाट को 01/05/2014 को BHEL द्वारा ध्वस्तीकरण किया गया।
वर्तमान समय में ( 1× 210 मेगावाट तृतीय चरण ) का ताप विद्युत केन्द्र BHEL द्वारा निर्मित चचाई में जून -2008 से संचालित हो रहा है जिसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया गया था।
जल्दी ही( 1× 660 मेगावाट चतुर्थ चरण ) के लिए नये संयंत्र का कार्य प्रारंभ होने वाला है जिसकी प्राथमिक औपचारिकताएं पूर्ण हो कर निविदा आमंत्रित की जा चुकी है।
700 एकड (2.8 Km2 ) एरिया में फैला चचाई पावर हाउस में कोयला की आपूर्ति रूप रेल मार्ग से सोहागपुर एरिया से एवं जलापूर्ति सुथना नाला पर निर्मित जलाशय से होती है।जलाशय के दुसरी ओर सोन नदी है।
सुथना नाला का उद्गम ग्राम - सोनहा है जो कि धिरौल, चकेठी, चिल्हारी से मेडियारास गांव होते हुए चचाई पावर प्लांट के जलाशय (डैम ) में मिलती है।वर्तमान समय में सुथना नाला के किनारों पर जबरदस्त अतिक्रमण किया जाकर खेती की जा रही है जिससे कि सुथना नाला का अस्तित्व संकट में है।
सम्प्रति MPPGCL नियंत्रित अमरकंटक ताप विद्युत केन्द्र चचाई मध्यप्रदेश और गुजरात सरकार की सम्मिलित परियोजना है।
OPM & HJM ( ओरियंट पेपर मिल, अमलाई निर्माण वर्ष 1962 -63 ) जिला - शहडोल भी पंडित शंभूनाथ शुक्ला जी की देन है जिसमें हजारों परिवार का जीवनयापन हो रहा है। वर्तमान समय में OPM ग्राम पंचायत बकहो जनपद पंचायत - बुढार से नगर परिषद बकहो का स्वरूप ले चुका है जिसका प्रथम निर्वाचन 2022 में संपन्न हुआ है।
HJM ( हूकूमचंद जूट मिल अमलाई )वर्तमान समय में जिला अनूपपुर में स्थित है लेकिन विगत वर्षों से बंद है।
शहडोल में पूर्व से संचालित शंभूनाथ शुक्ल महाविद्यालय जो कि वर्तमान समय में पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय का स्वरूप ले चुका है लेकिन शहडोल में महाविद्यालय को बंद कर दिया गया है जिसमें हजारों विद्यार्थियों ने शिक्षा ग्रहण किया है उस महाविद्यालय को पुनः प्रयास कर चालू करने की आवश्यकता है।
इसी प्रकार से अनूपपुर नगरपालिका द्वारा संचालित पंडित शंभूनाथ शुक्ला वाचनालय जो कि कई वर्षों से संचालित था को बंद कर दिया गया है जिसे अत्याधुनिक रुप देकर पुनः चालू करने की आवश्यकता है।
चचाई जलप्रपात नाम से ही उर्जा नगरी( अमरकंटक ताप विद्युत केंद्र - चचाई ) बन गया।
" नाम में कुछ तो है"
00 जीवेन्द्र सिंह 00
पूर्व उपाध्यक्ष, नगरपालिका परिषद
अनूपपुर ( म.प्र. )

