आजादी के पूर्व से जैतहरी बहुत महत्वपूर्ण आर्थिक /व्यापारिक / राजनैतिक /प्रशासनिक केंद्र रहा हैं
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अनूपपुर ।
लगभग 105 वर्ष पूर्व 1918 -19 के आसपास BNR ( बंगाल - नागपुर रेलवे ) के अंग्रेज अधिकारी जैतहरी को रेलवे जंक्शन बनाने का सर्वेक्षण कर, रेलवे जंक्शन के निर्माण कार्य के लिए अंग्रेज अधिकारियों के जैतहरी आगमन पर जैतहरी के ढनाढय व्यापारी सेठ विरधीचंद जी एवं अन्य किंकर्तव्यविमूढ़ बने रहे।
इस रवैये से खिन्न होकर ब्रिटिश शासन BNR के अफसरों ने अनूपपुर स्टेशन को रेलवे जंक्शन बनाया।जबकि अनूपपुर स्टेशन से पूर्व में ही जैतहरी स्टेशन निर्मित हो चुका था।
BNR की स्थापना 1887 मे हुई थी जो कि14 अप्रैल 1952 को EIRC ( East Indian Railway Company ) मर्ज हो गया था।
भौगोलिक दृष्टि से जैतहरी ही जंक्शन के लिए उपयुक्त था, हरद - धुरवासिन -मौहरी से होते हुए जैतहरी रेलवे लाइन आना था जिससे कि खिरना और तिपान नदी पर 02 रेलवे पुल भी नहीं बनाना पडता।
परंतु लगभग 105 वर्ष पूर्व घटित घटनाओं का असर अब दिखाई दे रहा है कि जैतहरी मे ट्रेन के 1 -2 मिनटों के स्टापेज के लिए अर्धनग्न होकर प्रदर्शन व आमरण अनशन तक करना पड़ रहा है।
पूर्व में जैतहरी कोतमा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था और कोतमा के विधायक कुंवर मृगेन्द्र सिंह थे,1956 मे जैतहरी को ब्लाक ( विकास खंड / जनपद पंचायत ) घोषित कराया, कल्लू राठौर के पूर्वजों ने कार्यालय हेतु जमीन दिया जहां पर आज भी कार्यालय संचालित है। जैतहरी ब्लाक में ही अनूपपुर सम्मिलित किया गया और आज भी अनूपपुर जैतहरी विकास खंड में आता है।
अनूपपुर - 1962 मे ब्लाक बना जो कि कोतमा ब्लाक को विभाजित कर बना था, उस समय पर सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत अनूपपुर आता था सोहागपुर विधायक दादा कृष्णपाल सिंह हुआ करते थे। किसी बढई के भूमि पर ब्लाक कार्यालय /परिसर बना , जहाँ पर आज जिला चिकित्सालय ( अस्पताल )संचालित है।
1975 मे जैतहरी नगरपालिका का नोटिफिकेशन जारी हुआ और तदर्थ समिति बनी जबकि अनूपपुर मे 1978 -79 मे नगरपालिका का नोटिफिकेशन हुआ इसके पूर्व ग्राम पंचायत सामतपुर के नाम से पंचायत था।
जैतहरी मे थाना और वन विभाग का रेंज आफिस,नगरपालिका था तो अनूपपुर मे चौकी और बीट गार्ड / फारेस्ट गार्ड / ग्राम पंचायत था।
अनूपपुर जंक्शन बनने के बाद से क्षेत्र का पूरा भूगोल दिनों - दिन बहुत तेजी से बदलता चला गया या फिर कहें कि अनूपपुर की लाटरी लग गई।
1977 मे अनूपपुर विधानसभा बना उसके बाद से तो विकास के नए आयाम जुडते चले गए।
सोहागपुर तहसील सें विभाजित होकर अनूपपुर तहसील कार्यालय बना।पुलिस थाना बना, वन विभाग का सब डिवीजन, SDM कार्यालय बनते हुए 15/08/2003 को जिला मुख्यालय का मुकाम हासिल किया।
19 नवंबर 1990 को एक मामूली विवाद के कारण युवा जोश ने ऐसा कदम उठाया जिसकी परिणाम स्वरूप गोली चालन हुआ नगर के होनहार युवा की अकाल मृत्यु हुई।सैकड़ों छात्र /युवा / बेगुनाह नागरिक जेल गए। उपद्रव इस कदर हुआ कि कई अधिकारियों के घरों को जला दिया गया। नगर में धारा 144 लगाना पडा।इस घटना के जिम्मेदार कौन थे- पहचानों जरा !
1999 -2000 मे ब्लाक बचाओ संघर्ष समिति बनाई गई जिसके द्वारा ब्लाक के सामने महीनो क्रमिक अनशन जारी रहा ,अनशन का समापन तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कराया और आश्वस्त किया कि ब्लाक अनूपपुर मे ही रहेगा लेकिन 14 वर्षो के बाद जून 2014 मे ब्लाक बदरा मे स्थानांतरित हो गया।बदरा मे कार्यालय का उद्घाटन ब्लाक बचाओ संघर्ष समिति के मुख्य कर्ता धर्ता ने ही किया वो भी अपनी ही पार्टी की सरकार मे। स्वार्थपरता का उत्कृष्ट प्रदर्शन साबित हुआ ।
38 वर्षों से संचालित ब्लाक कार्यालय अनूपपुर के जाने से लगभग 300 परिवारों का पलायन हुआ, 52 ग्राम पंचायतों के सरपंच /जनपद सदस्यों का आना जाना बंद हो गया।
अनूपपुर के बाजारों में आने वाले लाखों रुपये की दैनिक आवक धीरे - धीरे पिछले 10 सालों में कम हो गई।शनै -शनै ब्लाक स्तर के अनेक कार्यालय शिफ्ट होते चले गए।
ब्लाक का संघर्ष तो बहाना था मुख्य कारण नगरपालिका अनूपपुर मे उठा पटक कराना था।हुआ भी वहीं नगर में नकारात्मक अभियान के माध्यम से 2001 मे खाली कुर्सी / भरी कुर्सी हुई और ब्लाक संघर्ष समिति के मुख्य कर्ता बहुत ही चालाकी से अपनी पत्नी को अध्यक्ष पद पर बैठाने मे सफल रहे इस प्रकार से संघर्ष समिति को लक्ष्य की प्राप्ति हुई,उनका मकसद पूरा हुआ ।
एक कहावत है - आपन पी लेई औरन के घंघोर देई ,होय जऊन होए देई।
दया कुछ तो गडबड है !भरी वर्षांत मे फ्लाईओवर निर्माण संघर्ष समिति का गठन आनन - फानन मे 5-7 दिनों के भीतर हुआ है , कभी व्यापारी वर्ग, तो कभी नागरिक विकास फिर संघर्ष समिति और अंततः नागरिक समाज।
इसकी टाइमिंग भी संदेहास्पद है।सावन के महीने में किसी भी सिविल वर्क का प्रोग्रेस नही होता है। फिर भी जिला प्रशासन ने तत्काल नोटिस लेते हुए समिति से चर्चा की ,समिति ने सार्थक चर्चा होने का दावा किया तो सांकेतिक बंद के पीछे छुपा मकसद क्या है....?
अनूपपुर के व्यापारी बंधुओं जैतहरी का उदाहरण सामने है,आपकी एक ग़लती नगर को बहुत आगे या पीछे ले जा सकती है यदि ब्लाक संघर्ष समिति की कुटिल चाल को आप समझ लेते तो ब्लाक एवं आनुषंगिक कार्यालय आज भी अनूपपुर मे ही रहता ।
नगर के व्यापार में असर का मुख्य कारण ब्लाक स्तरीय कार्यालयों का बदरा जाना और रेलवे के लाइन प्रोग्राम ( TTE & CTI Office ) का आफिस शहडोल जाना है । जिसका असर अब दिखाई दे रहा है।
ग्राम पंचायत सामतपुर से जिला मुख्यालय तक का व्यापारिक लाभ लिया है तो रेलवे ओवरब्रिज बनने का लाभ भी पीढी दर पीढी मिलेगा।ROB का विरोध न किया गया होता तो 2020-21 मे ही फ्लाईओवर ब्रिज 90 फिट चौडाई का तैयार हो गया होता।
अत्यंत हर्ष का विषय है कि मध्यप्रदेश सरकार ने जनपद पंचायत ( ब्लाक ) पुनर्गठन आयोग का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। निश्चित रूप से हम सब लोग तथ्यात्मक रुप से अनूपपुर का नया दावा पेश कर अनूपपुर ब्लाक को पुनः नये परिसीमन के आधार पर प्राप्त कर सकते हैं अनूपपुर नगर के आसपास की ग्राम पंचायतों को समाहित कर।
अमरकंटक ताप विद्युत केंद्र चचाई,IGNTU ,जिला का गठन, सुथना ,चंदास, बकान, तिपान, सोन, केवई जैसे तमाम नदियों में पुल बने पर कही भी आंदोलन नही हुआ फिर भी अपने तय समय पर निर्मित हुआ।
ऐसी जन चर्चा है कि राजनीतिक उठापटक अनूपपुर नपा मे निकट भविष्य में होने वाला है । नगरपालिका अपना 02 वर्षों का कार्यकाल पूरा करने वाली है जिसके बाद नपा अधिनियमों के अंतर्गत कभी भी अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा सकता है...?
स्क्रिप्ट्स पर्दे के पीछे लिखा जा चुका है। ब्लाक बचाओं संघर्ष समिति के तर्ज पर !
डा. - राहत इंदौरी का शेर है -
सरहदों पर बहुत तनाव है क्या,
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या !
00 जीवेन्द्र सिंह 00

