*कुसुम बती पटेल को किडनी और हार्ट की समस्या थी और रेगुलर डायलिसिस चलता था, थोड़े समय पहले ही इनको हार्ट के लिए Pacemaker भी लगा था
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बिलासपुर l अपोलो हॉस्पिटल में सबकुछ ठीक चल रहा था। वो अपने रेगुलर चेकअप के लिए Appollo Hospital, Bilashpur जाते थें। २२ जुलाई २०२४ को भी वे अपने पैरो पर ऐसे ही एक रूटीन चेकअप के लिए गई हुई थी।
इनको डॉक्टर बोले की Pacemaker ठीक से काम नहीं कर रहा और कुछ समस्या की वजह से इसको निकालना पड़ेगा ऐसा कह कर इनको ICU में एडमिट करते है और फिर १ या २ दिन दवाई के बाद डॉक्टर बोलते है, पेसमेकर निकालते वक्त कुछ तार छूट गया है जिसकी वजह से इनको ज्यादा वक्त हॉस्पिटल में आईसीयू में ही रखना पड़ेगा।
अब यहां पर मेरी सासुमा को जो डॉक्टर देख रहे थे वो ३ doctor थे।
*Dr. Jignesh Pandya*
*Dr. Mahendra Parsad Samal*
*Dr. Avinash Gupta*
यह तीनो डॉक्टर की गलती की वजह से उनके दिमाग में इन्फेक्शन फैल जाता है और मेरी सासुमा अपनी यादाश्त खो देती हैं।
फिर जब हम वो तार जो बॉडी में रह गया था उसको निकालने के बारे में पूछते है तो डॉक्टर बोलते है, नहीं कोई तार नहीं छूटा है लेकिन वो तो इन्फेक्शन दिमाग में फैला है इसको कम करने के लिए HDU में शिफ्ट करते है।
*इस बीच हमने देखा की ३ डॉक्टर्स के बीच तालमेल की बहुत कमी थी।*
हार्ट वाला डॉक्टर बोले की हार्ट तो अब ठीक है, दिमाग के डॉक्टर से आप बात करो, दिमाग के डॉक्टर को पूछे तो वो बोलते है कि सब ठीक है रिकवरी हो रही है। किडनी के डॉक्टर के रिपोर्ट आ जाए तो हम आपको बताते है की क्या करना है।
*मतलब मरीज के रिश्तेदार को गुमराह करने का काम ये ३ डॉक्टर ने किया था।*
इस बीच १८, १९ को राखी का त्यौहार आया तो यह तीनो डॉक्टर्स छुट्टी में चले गए थे। इस टाइम पर असिस्टेंट डॉक्टर ड्यूटी पर थे। जिनको केस के बारे में कुछ ज्यादा पता भी नहीं था।
*जब डॉक्टर्स छुट्टी से वापस आए तब तक मेरी सासुमा की तबियत इतनी बिगड़ गई थी की* इनको ऑक्सीजन लगाना पड़ा।
*हमने डॉक्टर्स को पूछा तो बोले १० दिन दो हम अपना बेस्ट ट्राई करते है और पेशेंट को अच्छा करने की कोशिश करेंगें।*
लेकिन यह डॉक्टर्स की लापरवाही का नतीजा सासुमा को वेंटीलेटर लगाना पड़ा और वो २६ अगस्त को ऑलमोस्ट गुजर चुकी थी लेकिन डॉक्टर जानते थे की इनके बिल का ज्यादातर पैसा कंपनी SECL (South Eastern Coalfields Ltd) की तरफ से मिलने वाले थे इसलिए जान बुझ कर हम को ये बताया की अभी मरीज की सास चल रही है ऐसा कर और ४ दिन तक उन्हें वेंटीलेटर पर रखा और आखिर कर ३० अगस्त को हमें बोलते है की हम दवाई करके है हार चुके हैं , अब आप इन्हे घर ले जा सकते है और १५.६० लाख का बिल बनाया।
*आखिर कार मेरे सासुमा जो अपने पैरो पर चल कर हॉस्पिटल गई थी वो डॉक्टर्स की लापरवाही की वजह से अब इस दुनिया में नहीं रही।*
कहने का मतलब यह है की आज कल ज्यादातर डॉक्टर भगवान का रूप होने की बजाए हैवान का रूप बनते जा रहे हैं पैसे के अंधे मोह में। इंसानियत और मरीज की सेहत से ज्यादा पैसे इनको महत्वपूर्ण है।
Akshaya Kumar की मूवी Gabbar is Back में जैसे बताया गया है की केस आज के हॉस्पिटल मरे हुए इंसान से पैसे कमाता है वो सच में सही साबित किया है Apollo Hospital, Bilashpur के इन तीनों डॉक्टर्स ने।
कृपया आप भी अपने प्रियजन को अगर किसी हॉस्पिटल में एडमिट करते हैं तो यह सब चीज का ध्यान रखे और इस पोस्ट को इतना शेयर करें की कोई डॉक्टर यह करने से पहले कई बार सोचे।

