खेलों की चमक के पीछे गहराता साया: सेपक टेकरा सहित आयोजनों में लाखों की गड़बड़ी, सुर्खियों में क्रीड़ा विभाग
अनूपपुर । जिले में खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के उद्देश्य से शासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष कर जनजातीय क्षेत्रों में खिलाड़ियों को अवसर प्रदान करने हेतु विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन प्रयासों के तहत अनूपपुर जिले में भी व्यापक स्तर पर खेल गतिविधियों का आयोजन हुआ, जिससे कई प्रतिभाओं ने राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई यह निस्संदेह गर्व का विषय है।
जिला क्रीड़ा विभाग के माध्यम से पुष्पराजगढ़, कोतमा, जैतहरी और अनूपपुर विकासखंड के विद्यालयों में खो-खो, कबड्डी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स, सेपक टेकरा और क्रिकेट जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में लगभग 26 छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर जिले का नाम रोशन किया।
प्रशासनिक मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों में कलेक्टर, सहायक आयुक्त एवं अन्य अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। शासन की मंशा के अनुरूप खेलों को बढ़ावा देने के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन इन उपलब्धियों के पीछे एक चिंता जनक सच्चाई भी उभरकर सामने आ रही है।
*उपलब्धियों के पीछे विवादों का साया*
जहां एक ओर विभाग उपलब्धियों का ढिंढोरा पीट रहा है, वहीं दूसरी ओर इसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार खेल आयोजनों में पारदर्शिता की कमी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। लाखों रुपये की कथित गड़बड़ी अब अखबारों की सुर्खियां बन चुकी है।
बताया जाता है कि इन आरोपों की जांच के लिए समिति का गठन किया गया था और राजधानी से चार सदस्यीय जांच दल भी पहुंचा, लेकिन आज तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। इससे विभाग की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सूचना के अधिकार की अनदेखी
विभाग पर सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियों को समय पर उपलब्ध न कराने के आरोप भी लग रहे हैं। यदि यह सही है, तो यह पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
*पदस्थापना और जिम्मेदारियों पर सवाल*
क्रीड़ा विभाग में पदस्थापना को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। चर्चा है कि नियमों के विपरीत तरीके से वरिष्ठ पदों की जिम्मेदारियां निभाई जा रही हैं, जबकि योग्य अधिकारी मौजूद हैं। इससे विभागीय व्यवस्था की निष्पक्षता संदिग्ध होती जा रही है।
*जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से नाराजगी*
खेल आयोजनों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी भी विवाद का कारण बन रही है। वर्षों से खेलों को बढ़ावा देने वाले सामाजिक व्यक्तित्वों को अपेक्षित सम्मान न मिलना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे खेल संस्कृति को भी नुकसान पहुंच सकता है।
*चयन प्रक्रिया में पक्षपात के आरोप*
युवा खिलाड़ियों के चयन को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि चयन प्रक्रिया में “सिफारिश” और “पहचान” हावी हो रही है, जिससे वास्तविक प्रतिभाएं पीछे छूट रही हैं।
*सेपक टेकरा में भी गड़बड़ी के आरोप*
तेजी से लोकप्रिय हो रहे सेपक टेकरा खेल में भी वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। सवाल यह उठता है कि जब पहले ही गड़बड़ियों की जानकारी थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?अपनी ढपली, अपना राग’
कहावत है चोर की दाढ़ी में तिनका” और तो और खुद ही अपनी प्रशंसा करते दिख रहा है जैसे“अपनी ढपली, अपना राग।”
विभाग के कुछ जिम्मेदार लोग, जिनमें शेख खलील कुरैशी का नाम चर्चा में है, कथित तौर पर लाखों की गड़बड़ी के बाद अब अपनी छवि सुधारने में जुटे हैं। खबर यह भी है कि अपनी प्रशंसा के पुल खुद ही तैयार कराकर अखबारों में छपवाए जा रहे हैं।यह स्थिति उस कहावत को चरितार्थ करती है
“जितना बड़ा घोटाला, उतनी बड़ी सफाई।”
लेकिन सवाल यह है कि क्या शब्दों की चमक सच्चाई को ढक सकती है? क्या आत्म-प्रशंसा से जवाबदेही खत्म हो जाती है?
संपत्ति जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि संबंधित अधिकारियों की संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कहीं पद का दुरुपयोग तो नहीं हुआ।
*भविष्य की योजनाएं, लेकिन भरोसे का संकट*
आगामी सत्र में खेल गतिविधियों को और विस्तार देने की योजना हैनए प्रशिक्षण शिविर, प्रतियोगिताएं और कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। लेकिन मौजूदा विवादों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है
क्या इन योजनाओं का लाभ वास्तव में योग्य खिलाड़ियों तक निष्पक्ष रूप से पहुंचेगा?
अनूपपुर में खेल प्रतिभाओं का उभरना निश्चित रूप से गर्व की बात है। लेकिन इसके साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
यदि समय रहते इन आरोपों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो खेलों को बढ़ावा देने की मंशा पर ही प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है सुधार का या सिर्फ प्रचार का।

