परंपरागत सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षक थे भगवान बिरसा मुंडा - प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी


अमरकंटक । इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के बिरसा मुंडा चेयर के तत्वावधान में भगवान बिरसा मुंडा के 150 वीं जयंती समारोह में जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। सर्वप्रथम माननीय कुलपति जी ने मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर स्थापित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के अकादमिक कक्ष में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के माननीय कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी जी ने सभा को संबोधित करते हुए यह कहा कि यह पूरा क्षेत्र भगवान बिरसा मुंडा से अभिप्रेरित है। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के निवारण तथा राष्ट्र के प्रति उत्पन्न हो रही समस्या के निवारण हेतु अग्रणी योगदान दिया। वस्तुतः हमारे आस-पास कोई भी समस्या होती है तो प्रकृति में उस समस्या के समाधान भी विद्यमान होते है। प्रकृति में ऐसा कोई पौधा नहीं जिसमें औषधीय गुण न हो। भगवान बिरसा मुंडा में परंपरागत जड़ी बूटियों की समझ तथा परंपरागत चिकित्सा का अद्वितीय ज्ञान था, साथ ही साथ उनमें अद्भुत गुण भी थे, वे परंपरागत चिकित्सा के ज्ञाता तथा वृक्षों, नदियों एवं पशुओं से संवाद करने की कला के पारंगत व्यक्ति थे। उनके बांसुरी बजाने की भावाभिव्यक्ति लोगों में शांति, सुचिता, समन्वय और सुख के रूप में होती थी इसी कारण तत्कालीन समुदाय के लोग उन्हें कृष्ण के रूप में मानते थे। उन्होंने सदैव कुरीतियों का विरोध किया, शोषण के विरुद्ध आवाज उठाते हुए युवाओं का एक समूह तैयार किया तथा आगे का संघर्ष जारी रखा। वे अपने धर्म ग्रंथों से प्रेरित, प्रकृति के संरक्षण के प्रति सजग और सचेत तथा दिनचर्या में शाकाहार का पालन करने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने समाज में सुधार के लिए धार्मिक जागरूकता फैलाई। आदिवासियों को उनके पारंपरिक धर्म और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ा। उन्होंने मिशनरियों के धर्मांतरण अभियान का विरोध किया और आदिवासी परंपराओं को संरक्षित करने का प्रयास किया। धर्मो रक्षति रक्षतः की परंपरा का अनुसरण करने वाले वे आध्यात्मिक पुरुष, मार्गदर्शक, भविष्यदृष्टा थे, लोग उन्हें ‘वीर बिरसा’ के रूप में भी जानते थे। वस्तुतः ज्ञान के लिए तीन आवश्यक पक्ष है प्रथम अनुमान के आधार पर प्राप्त हो दूसरा अनुभव से प्राप्त हो और तीसरा सानिध्य से प्राप्त हो। यह ज्ञान की अविरल परंपरा जनजातीय समुदाय में रची बसी है, इसका संरक्षण और प्रसार की निरंतरता आवश्यक है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पदमश्री सम्मानित श्रीमती दुर्गा बाई व्याम ने सावन के महीने में जनजातीय समुदाय द्वारा गाए जाने वाले गीत के माध्यम से लोगों को प्रेरित किया और यह बताया कि इस गीत के माध्यम से हम सभी आपसी संवाद, मनोरंजन और कार्य तीनों एक साथ करते हुए कार्य को सही आयाम प्रदान करते हैं।

विशिष्ट अतिथि के रूप विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता अकादमी प्रो. आलोक श्रोत्रीय जी ने कहा कि आज का दिन अत्यंत गौरव का क्षण है कि हम सभी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती समारोह में उपस्थित हुए हैं। वास्तव में भगवान बिरसा मुंडा जल जंगल और जमीन के प्रति अनुराग सदैव से था, वह धरती तथा प्रकृति से जुड़े रहना अत्यधिक पसंद करते थे। वह किसी व्याधि में या किसी रोगों को ठीक करने के लिए उनके पास अद्भुत दैवीय प्राकृतिक कौशल विद्यमान था। आवश्यक पक्ष यह है कि हम सभी को जनजातीय समुदाय से सामुदायिक भावना, संतोष की भावना, अल्प संसाधनों में जीने की शैली जैसे मूल्यों को सीखना चाहिए। साथ ही साथ यह भी सीखना चाहिए कि हम कैसे भूमि, उपज और जंगल को नुकसान पहुंचाये बिना अपने कार्यों को सही प्रकार से संपादित करें, हम कैसे अपनी संस्कृति से जुड़ाव रखें एवं अपने मस्तिष्क में क्षिति जल पावक गगन समीरा के प्रति सम्मान और संरक्षण की भाव भावना को अपने हृदय मे जागृत करके आत्मसात करें।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि  सुभाष सिंह ने अपने जीवन में घटित संघर्षों का संस्मरण सुनाया। जनजातीय पेंटिंग की महत्ता तथा उपादेयता के बारे में विस्तार से चर्चा किया। पारंपरिक चिकित्सा के जानकार  गोपाल सिंह पुशाम ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जंगलों में पौधों की औषधीय गुण तथा उनसे रोगों का निवारण विषय पर विस्तार से चर्चा की।

बिरसा मुंडा चेयर के आचार्य प्रो. प्रसन्न कुमार सामल ने कार्यक्रम के अतिथियों के प्रति स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया तथा बिरसा मुंडा चेयर की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का सफल संचालन उप-कुल सचिव डॉ. संजीव सिंह ने किया तथा कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापन विश्वविद्यालय के सह आचार्य एवं जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. वाई. बी. मनोहर ने प्रेषित किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एन. एस. एच. मूर्ति, आचार्य प्रो. एस. आर. पाढ़ी, प्रो. राघवेंद्र मिश्रा, प्रो. अजय वाग, प्रो. मनीषा शर्मा, प्रो. जितेंद्र शर्मा, प्रो. जी.एस. महापात्रा, एन. सी. सी. समन्वयक . जितेंद्र सिंह, उप कुलसचिव डॉ. पूजा तिवारी, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. विजय नाथ मिश्रा, डॉ. ललित कुमार मिश्रा, एन.एस.एस. के समन्वयक डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय, डॉ. दिलीप चौधरी, डॉ. जनार्दन, डॉ. सुनीता मिंज, डॉ. प्रवीण गुप्ता, डॉ. दिग्विजय नाथ चौबे, डॉ. पंकज तिवारी, डॉ. अभय प्रताप सिंह, डॉ. विनय तिवारी, डॉ. सौरभ कुमार सहित एन.एस.एस. के स्वयं सेवक तथा स्वयं सेविकाएं एवं एन.सी.सी. के विद्यार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

 *मां नर्मदा का आशीर्वाद मिलना सौभाग्य की बात- उपमुख्यमंत्री* 

*उपमुख्यमंत्री ने अमरकंटक के कबीर चबूतरा में नर्मदा परिक्रमा वासियों से की आत्मिक मुलाकात* 

 *उपमुख्यमंत्री ने मां नर्मदा की, की आरती* 

अनूपपुर । 15 नंबर 2024 प्रदेश शासन के उपमुख्यमंत्री  राजेंद्र


शुक्ल ने कहा है कि कार्तिक मास की पूर्णिमा में मां नर्मदा का दर्शन करने का अलग ही महत्व है। आज के दिन मां नर्मदा का आशीर्वाद मिलना परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा की परिक्रमा कर रहे परिक्रमा वासियों का दर्शन करने का सौभाग्य मिला यह अत्यंत हर्ष का विषय है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा पुराण में लिखा है कि मैकाल की परिक्रमा सारी विश्व की परिक्रमा मानी जाती है तथा पौराणिक ग्रंथों में लिखा है कि नर्मदा के तट का एक-एक कंकड़ शंकर है। यह हमारी सनातन संस्कृति है, हमारी संस्कृति एवं सनातन को हम सभी समझे तथा आने वाली पीढ़ी को इसे सौंपें, जिससे मानव जाति का कल्याण हो सके। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री आज अनूपपुर जिले के अमरकंटक के कबीर चबूतरा में मां नर्मदा की परिक्रमा कर रहे परिक्रमा वासियों से मुलाकात कर उन्हें संबोधित कर रहे थे। 

  उपमुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा नर्मदा परिक्रमा की यात्रा, यह हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी आस्था है। निश्चित रूप से इसका सकारात्मक असर आने वाले दिनों में प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि पुराणों में लिखा है कि मां गंगा के स्नान से जो पुण्य मिलता है, वह मां नर्मदा के दर्शन से मिल जाता है। यहां आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है तथा नर्मदा परिक्रमा वासियों से मिलना परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि आज भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर जनजाति गौरव दिवस का आयोजन शहडोल में किया गया तथा भगवान बिरसा मुंडा ने भी देश को तथा सनातन संस्कृति को बचाने के लिए अनेक कदम उठाने तथा महा मानव के रूप में सामने आए।  इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने अमरकंटक के कबीर चबूतरा में परिक्रमा कर रहे परिक्रमा वासियों से आत्मीय मुलाकात की तथा मां नर्मदा की आरती में शामिल होकर मां नर्मदा की आरती की। इस दौरान साधु-संत, विंध्य विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष  रामदास पुरी एवं बड़ी संख्या में परिक्रमा वासी उपस्थित थे।

 वनमाली सृजन केंद्र अनूपपुर का कल होगा शुभारंभ


अनूपपुर ।  वनमाली सृजन केंद्र अनूपपुर का कल भव्य शुभारंभ होने जा रहा है इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शासकीय तुलसी महाविद्यालय से सेवा निवृत्त प्राचार्य   परमानंद तिवारी जी एवं शासकीय तुलसी महाविद्यालय से हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ दीपक गुप्ता जी होंगे। इस अवसर पर काव्य पाठ के साथ -साथ "हिंदी हमें जोड़ती है" विषय पर व्याख्यान होंगे। यह केंद्र कल से अपना कार्य प्रारंभ करते हुए  आंचलिक प्रतिभाओं(रचनाकारों) को उभारने और प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें मंच प्रदान करने की कोशिश की जाएगी।

 इस अवसर पर वनमाली पत्रिका के सितंबर ,अक्टूबर अंक का विमोचन होगा। कार्यक्रम के पूर्व की गतिविधियों के तहत अनेक स्कूलों में निबंध लेखन, कविता, पेंटिंग, भाषण आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की गई है। इन प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों को कार्यक्रम के दौरान पुरस्कार एवं प्रमाण- पत्र प्रदान किए जाएंगे।  बताते चलें वनमाली सृजन पीठ वनमाली जी की लेखन यात्रा से प्रेरित है, जो साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए बनाया गया एक मानद उपक्रम है। ग्रामीण रचनाकारों को शहरी रचनाकारों के समान ही अवसर मिलना चाहिए, इस मूल अवधारणा पर आधारित यह उपक्रम सभाएं, चर्चाएं और अन्य साहित्यिक प्रवचन आयोजित करता है। वनमाली सृजन पीठ, हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के विस्तार के लिए लेखन रत साहित्यकारों को प्रतिष्ठित वनमाली राष्ट्रीय सम्मान, की परंपरा डाली है।  इसमें वनमाली कथा शीर्ष सम्मान, राष्ट्रीय कथा सम्मान, प्रवासी भारतीय कथा सम्मान, तथा वनमाली विज्ञान कथा सम्मान एवं मध्य प्रदेश कथा सम्मान और युवा कथा सम्मान सहित पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत किया जाता है।  संपूर्ण भारतवर्ष में वनमाली सृजन पीठ की स्थापना की गई है । सृजन पीठ  मुख्यालय के माध्यम से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विकास के नये आयाम तय किए  हैं।  सुदूर ग्राम्यांचल एवं कस्बों के  कला, साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक सरोकारों की गतिविधियों को बढ़ावा देने में निरंतर सक्रिय वनमाली सृजन केन्द्रों की स्थापना जिले  एवं आंचलिक स्तर पर की गई है,  जिसमें आंचलिक प्रतिभाओं को उभारने  और राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें प्रस्तुत करने की कोशिश की जाती है।  सभी सृजन केंद्रों की आपसी गतिविधियों को साझा करने के लिए “वनमाली वार्ता पत्रिका” का प्रकाशन ऑनलाइन किया जा रहा है। वनमाली  सृजन पीठ भोपाल ने  अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव का आयोजन कर वैश्विक स्तर पर एक स्वर्णिम मुकाम बनाया है।

वनमाली सृजन पीठ द्वारा स्थापित पुरस्कार एक कथाकार (श्री जगन्नाथ प्रसाद चौबे जी) की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने साहित्य और कार्यों के माध्यम से इन मूल्यों को बनाए रखने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। पुरस्कार के प्राप्तकर्ता का चयन दो साल की अवधि में हिंदी भाषा की कहानी और उपन्यास साहित्य में उनके योगदान के आधार पर किया जाता है।

उल्लेखनीय है चालीस से साठ के दशक के बीच ‘वनमाली  हिन्दी के कथा जगत के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर थे। 1934 में उनकी पहली कहानी ‘जिल्दसाज़’ कलकत्ते से निकलने वाले ‘विश्वमित्र’ मासिक में छपी और उसके बाद लगभग पच्चीस वर्षों तक वे प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं ‘सरस्वती’, ‘कहानी’, ‘विश्वमित्र’, ‘विशाल भारत’, ‘लोकमित्र’, ‘भारती’, ‘माया’, ‘माधुरी’ आदि में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे। अनुभूति की तीव्रता, कहानी में नाटकीय प्रभाव, सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक समझ और विश्लेषण की क्षमता के कारण उनकी कहानियों को व्यापक पाठक वर्ग और आलोचकों दोनों से ही सराहना प्राप्त हुई। आचार्य नंद दुलारे बाजपेयी ने अपने श्रेष्ठ कहानियों के संकलन में उनकी कहानी ‘आदमी और कुत्ता’ को स्थान दिया था। करीब बीस वर्षों तक मध्यप्रदेश के अनेक विद्यालयों, महाविद्यालयों में वनमाली जी की कहानियां पढ़ाई जाती रहीं। उन्होंने करीब सौ से ऊपर कहानियां, व्यंग्य लेख एवं निबंध लिखे। कथा साहित्य के अलावा उनके व्यंग्य निबंध भी खासे चर्चित रहे हैं। आकाशवाणी इंदौर से उनकी कहानियां नियमित रूप से प्रसारित होती रहीं।

कथा साहित्य के अतिरिक्त ‘वनमाली’  जी का शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा। वे अविभाजित मध्यप्रदेश के अग्र गण्य शिक्षाविदों में थे। गांधी जी के आव्हान पर कई वर्षों तक प्रौढ़ शिक्षा के काम में लगे रहे। फिर शिक्षक, प्रधानाध्यापक एवं उपसंचालक के रूप में उन्होंने बिलासपुर, खंडवा और भोपाल में कार्य किया और इस बीच अपनी पुस्तकों के माध्यम से, शालाओं और शिक्षण विधियों में नवाचार के कारण और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद् की समिति के सदस्य के रूप में शिक्षा जगत में उन्होंने महत्वपूर्ण जगह बना ली थी। 1962 में डां. राधाकृष्णन के हाथों उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से विभूषित किया गया। वनमाली जी का जन्म 1 अगस्त 1912 को आगरा में हुआ। उन्होंने अपना पूरा जीवन मध्यप्रदेश में ही गुजारा और 30 अप्रैल 1976 को भोपाल में उनका निधन हुआ। उनका पहला कथा संग्रह ‘जिल्दसाज’ उनकी मृत्यु के बाद 1983 में तथा ‘प्रतिनिधि कहानियां’ के नाम से दूसरा संग्रह 1995 में प्रकाशित हुआ था। वर्ष 2008 में वनमाली समग्र का पहला खण्ड तथा वर्ष 2011 में संतोष चौबे के संपादन में ‘वनमाली स्मृति’ तथा ‘वनमाली सृजन’ शीर्षक से दो खण्ड और भी प्रकाशित हुए हैं।

 *जनजातीय गौरव दिवस पर उत्साह और उमंग से मनाई गई भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती


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अनूपपुर । 15 नवम्बर 2024 जनजातीय महानायक महापुरुष बिरसा मुण्डा के 150 वीं जयंती के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित शासकीय एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय अनूपपुर के ऑडोटोरियम में जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर  हर्षल पंचोली, पुलिस अधीक्षक  मोती उर रहमान, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  तन्मय वशिष्ठ शर्मा, एसडीएम अनूपपुर  महिपाल सिंह गुर्जर, संयुक्त कलेक्टर  दिलीप कुमार पाण्डेय, जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त सुश्री सरिता नायक, उप संचालक कृषि  एन.डी. गुप्ता, जनजातीय कार्य विभाग के क्षेत्र संयोजक  एस.के. बाजपेयी, प्राचार्य  मुलायम सिंह परिहार, कन्या विद्यालय के प्राचार्य डॉ. कौशलेन्द्र सिंह सहित इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिन्ट मीडिया के पत्रकार तथा स्थानीय नागरिक, शिक्षक, विद्यार्थी, शासकीय सेवक एवं हितग्राही उपस्थित थे। 

*वर्चुअल माध्यम से प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के उद्बोधन को देखा एवं सुना गया* 

कार्यक्रम में बिहार के जमुई से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी तथा शहडोल स्थित बाणगंगा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम से माननीय राज्यपाल  मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के उद्बोधन कार्यक्रम को सीधा प्रसारण के माध्यम से देखा एवं सुना गया। 

*रंगोली प्रतियोगिता तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हुआ आयोजन*

कार्यक्रम में स्थानीय प्रस्तुति के तहत शासकीय एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय अनूपपुर की छात्राओं द्वारा जनजातीय गीत पर सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर रंगोली प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यालयीन छात्राओं द्वारा जनजातीय गौरव महापुरुष  बिरसा मुण्डा जी के छायाचित्र पर आधारित रंगोली बनाई गई थी। 

*भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना सहित अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को प्रदान किया गया हितलाभ* 

कार्यक्रम में आदिवासी वित्त विकास निगम द्वारा संचालित भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना के तहत पुष्पराजगढ़ विकासखण्ड के बराती अमरकंटक निवासी  नितिन पिटानिया को 20 लाख की लागत के ट्रेवलर वाहन तथा विकासखण्ड अनूपपुर के ग्राम कदमटोला निवासी  आकाश कुमार धार्या को 9.95 लाख की लागत की ट्रेक्टर-ट्राली का हितलाभ प्रदान किया गया। इसी तरह जिला अन्त्यावसाई सहकारी विकास समिति अनूपपुर द्वारा संत रविदास स्वरोजगार योजना के अंतर्गत हार्डवेयर व्यवसाय हेतु अनूपपुर निवासी  ओमप्रकाश प्रजापति को 15 लाख रुपये के चेक का वितरण किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग अंतर्गत ग्राम चिल्हारी निवासी  भगवान दीन को किसान क्रेडिट कार्ड तथा ग्राम पंचायत जमुड़ी के ग्राम डिड़वापानी के 11 कृषकों को मसूर के उन्नत बीज की मिनी किट का वितरण किया गया। 

*रंगोली और सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए पुरुस्कृत हुईं छात्राएं*  

महापुरुष बिरसा मुण्डा के जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में रंगोली प्रतियोगिता में कक्षा 11 की छात्रा मोनिका रानी सिंह को प्रथम, कक्षा 12 वीं की छात्रा हेमलता श्याम को द्वितीय, कक्षा 11 वीं की छात्रा अंजू सिंह को तृतीय स्थान प्राप्त करने पर पुरुस्कृत किया गया। इसी तरह सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुति देने वाले एकलव्य विद्यालय की छात्राओं को भी अतिथियों द्वारा पुरुस्कार प्रदान किए गए।


04 वर्ष पुराने हत्या के मामले का फरार आरोपी की बिजुरी पुलिस द्वारा गिरफ्तारी


   अनूपपुर । पुलिस अधीक्षक  मोती उर् रहमान पुलिस अधीक्षक अनूपपुर द्वारा पुराने अनसुलझे हत्या के प्रकरणों के खुलासे हेतु निर्देशित किया गया था तथा पता तलाश हेतु सार्थक निर्देश दिये गये हैं जिसके अनुपालन में बिजुरी पुलिस द्वारा आज दिनांक 13/11/24 को हत्या के मामले में 04 वर्ष से फरार आरोपी को गिरफ्तार किया गया है ।

            प्रकरण का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 29-30/11/2021 की दरम्यानी रात सरस्वती स्कूल के सामने मीट मार्केट बिजुरी के पास एक अज्ञात व्यक्ति के द्वारा सुरेन्द्र बहादुर राय उर्फ दरबारी निवासी खोंगापानी बी सी एम चौकी खोंगापानी थाना झगराखांड़ की हत्या कर दी गई जिस पर से थाना बिजुरी में अप.क्र. 350/21 धारा 302 ताहि का पंजीबद्ध कर अनुसंधान में लिया गया प्रकरण के अनुसंधान में साबिर अली पिता मो. हदीस निवासी अलीनगर थाना बिजुरी के द्वारा मृतक की हत्या पुराने लेन देन के विवाद के कारण किये जाने का खुलासा हुआ आरोपी घटना दिनांक से लगातार फरार था आरोपी की पता तलाश हेतु उद्घोषित  ईनाम राशि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डीसी सागर महोदय शहडोल के द्वारा 30000 रुपये (तीस हजार) की गई थी जिसके संबंध में इस्तेहार जारी कर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के थानों में प्रसारित किया गया अनूपपुर जिले के सरहदी थानों से लगे सभी थाना प्रभारियों से व्यक्तिगत संपर्क कर उक्त फरार आरोपी के संबंध में जानकारी दी गई जो डोंगरगढ़ (छ.ग.) से यह सूचना प्राप्त हुई कि डोंगरगढ़ मे एक चोरी का आरोपी सुरेन्द्र विश्वकर्मा पिता विनय विश्वकर्मा उम्र 32 वर्ष निवासी बिलासपुर का मिला है जिसका हुलिया व चेहरा प्रकरण के फरार आरोपी साबिर से मिलता है जिसकी तस्दीक पर यह पाया गया कि प्रकरण का फरार आरोपी साबिर अली पिता मो. हदीस निवासी अलीनगर थाना बिजुरी का रायपुर में अपना उक्त नाम रखकर फरारी काट रहा था । थाना डोंगरगढ़ की सूचना पर दिनांक 12/11/24 को आरोपी साबिर अली को डोंगरगढ़ उपजेल से वारंट में लेकर थाना बिजुरी लाया गया जिसमें पूछताछ में जुर्म स्वीकार किया है आरोपी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय भेजा जा रहा है, यह तथ्य उल्लेखनीय है कि आरोपी के विरुद्ध चोरी ,लूट ,गृह भेदन के 11 से अधिक अपराध हैं आरोपी दुर्ग (छ.ग.) में अपने छद्म नाम सुरेन्द्र विश्वकर्मा से चोरी के एक प्रकरण में जेल जा चुका है ।

    उपरोक्त कार्यवाही मे निरी. विकास सिंह , उपनिरी. सोने सिंह परस्ते, उपनिरी. यूएन मिश्रा, प्र.आर 171 सतीष मिश्रा, आर 349 रामनिवास गुर्जर, 250 नरेन्द्र जाट की उल्लेखनीय भूमिका रही ।

 *देव उठनी एकादशी पर नर्मदा उद्गम अमरकंटक के रामघाट पर प्रज्ज्वलित किए गए 11 हजार दीप*


 

*पंच महाआरती, दीप दान के साथ ही भजन और सांस्कृतिक संध्या का हुआ आयोजन*

*कलेक्टर सहित संत-महात्माओं ने की सहभागिता*

अनूपपुर ।13 नवम्बर 2024 मंगलवार की शाम मां नर्मदा की उद्गम स्थली पवित्र नगरी अमरकंटक में देव उठनी एकादशी के पावन पर्व पर अमरकंटक संत मण्डल द्वारा 11 हजार दीपों के दान, पंच महाआरती, भजन संध्या सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  अमरकंटक के इतिहास में संत मंडल के नेतृत्व एवं जन सहभागिता से आध्यात्मिक, धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भव्य व मंत्रमुग्ध करने वाला था। कलेक्टर  हर्षल पंचोली सपत्नीक आयोजन में मुख्य यजमान के रुप में शामिल हुए । अमरकंटक संत मंडल द्वारा देव उठनी एकादशी के शुभ अवसर पर  आयोजित कार्यक्रम में अमरकंटक, पेण्ड्रा, राजेन्द्रग्राम, अनूपपुर,कोतमा, बिजुरी, डिण्डोरी, बुढार ,शहडोल के लोगों ने भी बढ चढ कर हिस्सा लिया।

*परंपरा के रुप में प्रति वर्ष होगा आयोजन*

इस अवसर पर उपस्थित संत गणों, पंडा - पुजारियों, श्रद्धालुओं, गणमान्य नागरिकों, वरिष्ठ पत्रकारों को संबोधित करते हुए कलेक्टर  हर्षल पंचोली ने दीपदान आयोजन की भूरि - भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि दीपावली के बाद देव उठनी एकादशी के पर्व पर माता नर्मदा जी की उद्गम नगरी अमरकंटक के रामघाट में संत मंडल और गणमान्य लोगों के सहयोग से दीपदान और पंच आरती का भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसे प्रतिवर्ष परंपरा के रुप में सभी के सहभागिता से आयोजित किया जाएगा। हमारा प्रयास होगा कि ऐसे भव्य - दिव्य अन्य आयोजन अमरकंटक में होते रहें। ऐसे आयोजनों से अमरकंटक में पर्यटन को बढावा मिलेगा। इससे पूर्व वे कार्यक्रम में शामिल होने आए सभी विद्वत संत गणों से मिल कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

*रामघाट में हुआ 11 हजार दीपदान*

देव उठनी एकादशी- तुलसी विवाह अवसर पर अमरकंटक संत मण्डल द्वारा नर्मदा उद्गम के रामघाट के दक्षिण तट पर 11 हजार दीप प्रज्ज्वलित किए गए। श्रद्धालुओं द्वारा रामघाट को रंगोली,पुष्पमाला,रंगीन बिजली की लाईट से सजावट कर कार्यक्रम को अत्यंत मनोहारी बनाया गया था। शायं 5 बजे से शुरु हुआ कार्यक्रम रात्रि 9 बजे तक चलता रहा। दीपदान और पंच आरती से पूर्व भजन कीर्तन , वैदिक मंत्रोच्चारण कर नर्मदाष्टक से नर्मदा मैया की विधिवत पूजा-अर्चना की गयी। मृत्युंजय आश्रम के वेदपाठी शिष्यों द्वारा सस्वर पाठ किया गया। इसके पश्चात नर्मदा तट के रामघाट पर 11 हजार दीप प्रज्ज्वलन के साथ दीपदान करते हुए काशी के आचार्यों  द्वारा पंच महाआरती की गयी। इस महा आरती में कलेक्टर  पंचोली ने स्वयं सपत्नीक महा आरती की।

*सांस्कृतिक आयोजन से मंत्र मुग्ध हुए लोग

अमरकंटक संत मंडल के द्वारा आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में मां कल्याणिका पब्लिक स्कूल पेंड्रा रोड, कल्याणिका केन्द्रीय शिक्षा निकेतन विद्यालय अमरकंटक, सरस्वती शिशु उच्च माध्यमिक विद्यालय अमरकंटक एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अमरकंटक के छात्र-छात्राओं ने कला का प्रदर्शन कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन्हे संत गणों और कलेक्टर  हर्षल पंचोली ने प्रशस्ति पत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया। कलेक्टर द्वारा सभी छात्र-छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया गया।

*दस सदस्यीय प्रशिक्षु आईएएस दल ने किया अवलोकन

जिले में दस सदस्यीय प्रशिक्षु आईएएस दल भ्रमण पर है। नर्मदा तट पर आयोजित दीपदान  - पंच आरती कार्यक्रम में प्रशिक्षु आईएएस दल भी शामिल हुए। प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों ने श्रद्धाभाव से कार्यक्रम में सहभागिता निभाई।

*नर्मदा स्वच्छता का दिया संदेश*

दीपदान महोत्सव के पूर्व संत मंडल के पूज्य संतों ने नर्मदा जी में स्वच्छता अभियान चलाया। संतों द्वारा नर्मदा जी में उतर कर लगभग तीन घंटे श्रमदान करके नदी और घाट की सफाई करके स्वच्छता का संदेश दिया गया। 

*इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका*

आयोजन को सफल बनाने में श्री महामृत्युंजय आश्रम, श्री कल्याण सेवा आश्रम, श्री गीता स्वाध्याय मंदिर, श्री शांति कुटी आश्रम, श्री परमहंस धारकुण्डी आश्रम, श्री तुरिय आश्रम श्री फलहरी आश्रम श्री मार्कण्डेय आश्रम, श्री झूलेलाल मंदिर, श्री गोपाल आश्रम, धरमपानी, रुद्रगंगा आश्रम, वैदिक लाईफ फाउण्डेशन के साथ ही संत, महात्मा, आश्रमों के सेवक, विद्या अध्ययनरत विद्यार्थी तथा जनमानस के साथ ही महंत स्वामी रामभूषणदास जी महाराज, स्वामी महेश चेतन्य जी महाराज, स्वामी लवलीन महाराज, स्वामी धरमानन्द जी महाराज,  योगेश दुबे, पत्रकार  श्रवण उपाध्याय एवं  मन्नू पाण्डेय सहित अमरकंटक संत मण्डल के 25 सदस्यीय पदाधिकारियों का उल्लेखनीय योगदान रहा।

 जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने हेतु चल रहे अभियान में लाएं प्रगति-कलेक्टर


स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डोर टू डोर बनाए जा रहे आयुष्मान कार्ड कार्य का करें मॉनिटरिंग- कलेक्टर

कलेक्टर ने जिले में आयुष्मान कार्ड हेतु चलाए जा रहे अभियान के प्रगति की समीक्षा

अनूपपुर । 13 नवंबर 2024 कलेक्टर  हर्षल पंचोली ने कहा है कि जिले में 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों का आयुष्मान कार्ड बनाने हेतु जिले में चल रहे अभियान में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं मैदानी अमला प्रगति लाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिले में डोर टू डोर बनाए जा रहे आयुष्मान कार्ड कार्य की सतत् मानीटरिंग करें तथा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार आयुष्मान कार्ड बनवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला आयुष्मान कार्ड बनाने हेतु प्रातः 9 बजे से अपने-अपने क्षेत्र में डोर टू डोर सर्वे कार्य में जुटकर आयुष्मान कार्ड बनाएं तथा सुपरवाइजर, एएनएम एवं आशा कार्यकर्ता द्वारा आयुष्मान कार्ड बनाने के कार्य की सतत् मॉनिटरिंग करें। कलेक्टर  हर्षल पंचोली आज कलेक्ट्रेट कार्यालय के नर्मदा सभागार में जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने हेतु चल रहे अभियान के प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।

बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत  तन्मय वशिष्ठ शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ए.के. अवधिया सहित जिले के सभी प्रमुख खण्ड चिकित्सा अधिकारी एवं सुपरवाइजर उपस्थित थे।   

बैठक में कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजरों से उनके क्षेत्र अंतर्गत बनाए गए आयुष्मान कार्ड की स्थिति एवं प्रगति की जानकारी प्राप्त की तथा आयुष्मान कार्ड बनाने में और अधिक प्रगति लाने के निर्देश देते हुए कहा कि एएनएम एवं आशा कार्यकर्ता के कार्य की मॉनिटरिंग सुपरवाइजर, सुपरवाइजर के कार्य की मॉनिटरिंग बीएमओ करें, जिससे आयुष्मान कार्ड बनाने की गति बढ़ सके। बैठक में कलेक्टर ने एक सप्ताह के भीतर अभियान के तहत बेहतर से बेहतर कार्य करके आयुष्मान कार्ड बनाने में प्रगति लाने के निर्देश दिए। 

उन्होंने कहा कि मैदानी अमले द्वारा किए जा रहे कार्यों के प्रगति की समीक्षा करना हो तो अधिकारी प्रातः 9 बजे से पहले अथवा शाम 6 बजे के बाद समीक्षा करें, जिससे मैदानी अमला प्रातः 9 बजे से शाम 6 बजे तक डोर टू डोर सर्वे कर ज्यादा से ज्यादा लोगों का आयुष्मान कार्ड बना सकें। बैठक में कलेक्टर ने आयुष्मान कार्ड से संबंधित व्हाट्सएप ग्रुप की जानकारी प्राप्त की तथा अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयुष्मान कार्ड से संबंधित एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाए तथा सभी एएनएम, आशा कार्यकर्ता तथा सुपरवाइजर अपनी लाइव लोकेशन वाली फोटो उस ग्रुप पर भेजना सुनिश्चित करें तथा कार्य की प्रगति की जानकारी दें। इसी प्रकार कलेक्टर ने आयुष्मान कार्ड से संबंधित अन्य विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

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