GST पर शोध में जियाराम ने रचा इतिहास, जीता ‘सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कारnarmadanewstimes. in

 *GST पर शोध में जियाराम ने रचा इतिहास, जीता ‘सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार



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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई कॉलेज में दिनांक 16 व 17 अप्रैल को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक (मध्य प्रदेश) के अर्थशास्त्र विभाग के शोधार्थी जिया राम ने अपने उत्कृष्ट शोध कार्य से राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की।

“GST Reforms and Their Impact on MSMEs, Startups and Entrepreneurship: Pathway to Viksit Bharat @2047” विषय पर आयोजित इस सेमिनार में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों एवं विशेषज्ञों द्वारा कुल 119 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। कड़ी प्रतिस्पर्धा और गहन मूल्यांकन के बाद जिया राम के शोध पत्र *“GST दरों में कमी के बावजूद खुदरा बाजार की कीमतों में कमी का अभाव: छोटे दुकानदारों का व्यवहारिक अध्ययन”* को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया और उन्हें *‘बेस्ट रिसर्च पेपर अवॉर्ड’* से सम्मानित किया गया।

इस शोध कार्य में जिया राम के साथ सहयोगी लेखक के रूप में चतुर सिंह चौधरी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। दोनों शोधार्थियों ने मिलकर जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण और व्यवहारिक अध्ययन के माध्यम से यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया, कि GST दरों में कमी का लाभ अधिकांश मामलों में सीधे उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि कई छोटे दुकानदार पुराने दरों पर ही सामान बेचते रहे, जबकि कुछ दुकानदार केवल विशेष अनुरोध पर ही घटे हुए दरों का लाभ दे रहे थे।

यह शोध वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक माना गया और विशेषज्ञों ने इसे नीति-निर्माण के लिए उपयोगी बताया।

इस अवसर पर भारतीय आर्थिक संघ के अध्यक्ष एवं मणिपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आद्या प्रसाद पांडे, आचार्य विनय कुमार श्रौं त्रिया, अधिष्ठाता दिल्ली स्कूल आफ इकोनॉमिक्स, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की से प्रो. एस.के. सिंह, भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधानपरिषद सदस्य वीणा पांडे सहित देश के कई प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे। सभी ने शोधार्थियों के प्रयासों की सराहना की और इस प्रकार के व्यावहारिक शोध को समय की आवश्यकता बताया।

जिया राम वर्तमान में डॉ. विनोद सेन के मार्गदर्शन में अपना शोध कार्य कर रहे हैं और वे मूल रूप से राजस्थान के बाड़मेर जिले के निवासी हैं। उनकी इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल है, वहीं उनके गृह क्षेत्र में भी गर्व की भावना देखी जा रही है।

यह उपलब्धि न केवल जिया राम और उनके सह-लेखक चतुर सिंह चौधरी के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह युवा शोधार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

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