जोरावर सिंह एवं फतेह सिंह की राष्ट्रधर्म निष्ठा और वीर बाल दिवस का इतिहास पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाएगा - प्रो. ब्योमकेश त्रिपाठी, प्र. कुलपति
अमरकंटक | 26 दिसंबर
वीर बाल दिवस के पावन अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के परिसर में साहिबज़ादों की अद्वितीय वीरता, त्याग और सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करते हुए विविध कार्यक्रमों, विचार–विमर्श, संवादात्मक सत्रों एवं प्रेरक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षण समुदाय को साहिबज़ादों के जीवन-मूल्यों—सत्य, साहस, अनुशासन और सेवा—से परिचित कराना तथा उन्हें अपने व्यवहारिक जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. ब्योमकेश त्रिपाठी, प्रभारी कुलपति ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबज़ादों का बलिदान भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। यह बलिदान आज भी युवाओं को कर्तव्यनिष्ठा, नैतिकता और साहस के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। साहिबज़ादों के जीवन आदर्शों—सत्य, साहस, अनुशासन और सेवा—को अपने आचरण में उतारना ही वीर बाल दिवस का वास्तविक संदेश है।”
उन्होंने यह भी घोषणा की कि साहिबज़ादा जोरावर सिंह एवं साहिबज़ादा फतेह सिंह की राष्ट्रधर्म निष्ठा और वीर बाल दिवस के ऐतिहासिक प्रसंगों को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने हेतु ठोस प्रयास किए जाएंगे।
प्रो. त्रिपाठी ने आगे कहा कि वीर बाल दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत की आत्मा में अंकित अदम्य साहस, धर्मनिष्ठता और सर्वोच्च बलिदान की अमर गाथा है। यह दिवस सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के दो अल्पायु किंतु महावीर पुत्रों—साहिबज़ादा बाबा जोरावर सिंह एवं साहिबज़ादा बाबा फतेह सिंह—की उस शौर्यपूर्ण शहादत को स्मरण करने का दिन है, जिसने मानव इतिहास को झकझोर कर रख दिया।
कार्यक्रम की संपूर्ण आयोजन रूपरेखा विश्वविद्यालय के डीन एवं चीफ वार्डन प्रो. विकास सिंह द्वारा तैयार की गई। उन्होंने साहिबज़ादों के ऐतिहासिक योगदान और उनके प्रेरणादाई जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम सभी भारतीयों के पूर्वजों—माताओं, बहनों, छोटे-छोटे बालकों और युवाओं—पर विदेशी आक्रांताओं द्वारा अमानवीय और क्रूरतम अत्याचार किए गए, किंतु भारत की आत्मा को कोई पराजित नहीं कर सका। भारत की वीर माताओं ने वीर सपूतों को जन्म दिया और उन वीर बालकों एवं युवाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि धर्म परिवर्तन, भय के आगे समर्पण और आत्मा का सौदा भारत स्वीकार नहीं करता।
इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. तरुण ठाकुर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “राष्ट्र और समाज के हित में निःस्वार्थ समर्पण ही सच्चे त्याग और बलिदान की पहचान है।
*वीर बाल दिवस स्मारिका का प्रकाशन*
वीर बाल दिवस के अवसर पर 200 से अधिक विद्यार्थियों ने अपने विचार बुक चैप्टर के रूप में प्रस्तुत किए हैं। इन सभी अध्यायों को संकलित कर ‘वीर बाल दिवस स्मारिका’ प्रकाशित की जाएगी।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न सेमेस्टरों के छात्र–छात्राओं आदित्य तिवारी, अंशिका सोनी, रागनी, रंजना, सुरभि तिवारी, रोशन यादव, मनीष चौरसिया, सचिन कुमार, मुस्कान कुमारी, जानवी सेन, सोफिया खान सहित अनेक विद्यार्थियों ने प्रेरक प्रस्तुतियाँ दीं। कुल 200 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण अनुराग कुमार सिंह, डॉ. वीरेंद्र प्रसाद, डॉ. आदित्य श्रीवास्तव, राजेश तुर्केल, डॉ. कमलेश कुमार पांडे, डॉ. दिनेश कुमार परस्ते, डॉ. आशीष गुप्ता, डॉ. पंकज प्यासी, हरीश विश्वकर्मा, ओमप्रकाश पाठक, खेलन सिंह एवं गौरव सिंह सहित शिक्षक, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र–छात्राएँ उपस्थित रहे। सभी ने साहिबज़ादो के आदर्शों को अपने आचरण में उतारने तथा राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

