🎨*चुनावी गुलाल ने उड़ा दी है- दीदी की नींद*
"व्यंग"
कहते हैं कि इस बार रंगों से पहले चुनावी गुलाल उड़ने वाला है। हमारी सांसद महोदया पर भी कुछ ऐसा ही रंग चढ़ा है,नींद में ही भांग का ऐसा असर कि सपना भी सीधे 2027 के चुनावी मंच पर जाकर टूटेगा। तभी कहीं दूर से ढोल-नगाड़ों की आवाज आई, जैसे भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की चुनावी रैलियां एक साथ कान में घोषणा-पत्र पढ़ रही हों , “अब जागिए, वरना जनता जगा देगी!”
सांसद महोदया हड़बड़ा कर उठीं। बरसों की गहरी निद्रा टूटी तो याद आया ,अरे! नरवा-गढवा तो दूर, अपने क्षेत्र की नल-जल योजना में भी पानी का रास्ता पूंछ रहा होगा? विकास कार्य ऐसे गायब थे जैसे होली के अगले दिन गली से रंग।
तभी एक शुभचिंतक प्रकट हुए राजनीतिक ज्ञान के चलता-फिरता विश्वकोश। बोले, “महोदया! काम-धाम छोड़िए, कैमरा पकड़िए। जहां कोई मरे , वहां गंभीर मुद्रा में फोटो। जहां शादी-ब्याह हो, वहां मुस्कान के साथ फोटो। जन्मदिन, छठी, बरहों सब पर आशीर्वाद वाली फोटो। जनता को काम नहीं, कैमरा एंगल याद रहता है।”
बस फिर क्या था! महोदया ने अपनी “चलन खटोला” निकाली जो लग्जरी कार कम और चुनावी हमसफ़र ज्यादा लग रही थी फिर क्या निकल पड़ीं। महल हो या झुग्गी, गली हो या चौपाल हर जगह वही स्थायी मुस्कान, जैसे होली का रंग अब चेहरे पर स्थायी टैटू बन गया हो।
मीडिया प्रभारी भी कम न थे। बरसों से जमी स्याही झाड़कर कलम ऐसी दौड़ाई मानो प्रेस क्लब ऑफ इंडिया से सीधा “सक्रियता रत्न” मिलने वाला हो। प्रेस नोट की भाषा में विकास हरी झंडी ऐसे लहराने लगा जैसे सूखे तालाब में अचानक मानसून उतर आया हो।
पत्रकारों की भी बांछे खिल उठे । जो अब तक “सांसद सो रहीं हैं” की खबर लिख-लिख कर थक चुके थे, उन्हें लगा चलो, जागरण का लाइव टेलीकास्ट तो मिलेगा! बखानों की झड़ी लग गई , “जनता के बीच पहुंचीं”, “हर सुख-दुख में सहभागी”, “क्षेत्र में बढ़ी सक्रियता”… मानो क्षेत्र नहीं, चुनावी प्रयोगशाला हो।
अब जनता भी देख रही है सोने वाली सांसद दीदी ज्यादा फायदेमंद थीं या जागने वाली ? क्योंकि होली का रंग तो दो दिन में उतर जाता है, पर वोट का रंग पांच साल तक चढ़ा रहता है।
तो भाइयों और बहनों चिंता छोड़, होली के रंग में रंग जाओ और एक दूसरे को गले मिल मुंह मीठा कर होली का भरपूर आनंद लो,*" कल किसने देखा... है।"*
*होली है… बुरा न मानिए, होली है!*
*छिछोरा टाइम्स*
*प्रधान संपादक*
*बीरेंद्र सिंह "ओजस्वी"*
*अनूपपुर मध्य प्रदेश*

