प्रधानमंत्री उत्कृष्ट महाविद्यालय अनूपपुर में नारी शक्ति वंदन पखवाड़े का आयोजन हुआ संपन्न
अनूपपुर । प्रधानमंत्री उत्कृष्ट महाविद्यालय शासकीय तुलसी महाविद्यालय अनूपपुर में नारी शक्ति वंदन पखवाड़े का आयोजन 13 अप्रैल 2026 को किया गया .यह पखवाड़ा 10 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक दो चरणों में आयोजित किया जाएगा. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर अनिल कुमार सक्सेना जी के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश सिंह और जिला पंचायत उपाध्यक्ष पार्वती राठौड़ जी की गरिमामई उपास्थिती में सरस्वती पूजन करते हुए इस कार्यक्रम की शुरूआत की गई .श्रीमती प्रीति रमेश ने अपने व्याख्यान में नारी शक्ति का आगाज करते हुए कहा की नारी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि सृजन, संवेदना, शक्ति और प्रेरणा का अद्भुत संगम है। वह माँ है, जो जीवन देती है; वह बहन है, जो स्नेह देती है; वह पत्नी है, जो साथ निभाती है; और वह बेटी है, जो भविष्य को संवारती है।
हमारे इतिहास और संस्कृति में नारी को सदैव उच्च स्थान दिया गया है। “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमन्ते तंत्र देवता:” अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है। फिर भी, यह एक विडंबना है कि आज भी समाज के कई हिस्सों में नारी को अपने अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ता है। आज की नारी हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का लोहा मनवा रही है ,चाहे वह शिक्षा हो, विज्ञान हो, राजनीति हो, या खेल का मैदान। उसने यह सिद्ध कर दिया है कि अवसर मिलने पर वह किसी से कम नहीं है। इसके बाद पार्वती राठौर जी ने नारी को महिमा मंडित करते हुए कहा की नारी सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और राजनीतिक रूप से इतना सक्षम बनाना कि वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं ले सकें। यह केवल महिलाओं के अधिकारों की बात नहीं है, बल्कि एक समतामूलक और प्रगतिशील समाज की नींव है।
कहा जाता है -“अगर आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं, तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है; लेकिन अगर आप एक महिला को शिक्षित करते हैं, तो पूरा परिवार शिक्षित होता है।”
यह कथन नारी की शक्ति और उसके महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
आज की नारी हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही है—चाहे वह विज्ञान हो, खेल हो, सेना हो या राजनीति। उसने यह सिद्ध कर दिया है कि वह किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। लेकिन इसके बावजूद, समाज के कई हिस्सों में आज भी महिलाओं को भेदभाव, असमानता और हिंसा का सामना करना पड़ता है।
इसलिए नारी सशक्तिकरण की आवश्यकता आज भी उतनी ही है जितनी पहले थी। इसके लिए सबसे पहला कदम है—शिक्षा। शिक्षा ही वह माध्यम है, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाती है और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागृत करता है। डॉ नीरज श्रीवास्तव ने विचार व्यक्त करते हुए कहा भारतीय संस्कृति सदियों से नारियों का सम्मान करता रहा, हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा में नारियों को उच्च दर्जा प्राप्त है । हर युगों में नारियां समाज और देश को अपने योगदान से मजबूती प्रदान करती रही हैं । नारियों की सुरक्षा और सम्मान हमारा दायित्व है ।
महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉक्टर जे के संत जी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त महिला प्राध्यापकों को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में डॉ नीरज श्रीवास्तव, प्रोफेसर विनोद कोल, डॉक्टर तरन्नुम सरवत, सहित महाविद्यालय के समस्त अधिकारी ,कर्मचारी एव छत्रों की गरिमामयी उपस्थिति रही ।
इस अवसर पर सूर्य समृद्धि आशा भोंसले को भावभीनी श्रद्धांजलि देकर कार्यक्रम का समापन किया गया।



