आत्मशुद्धि के महापर्व पर्युषण बिजुरी में भव्यता से हो रहेnarmadanewstimes. in

 आत्मशुद्धि के महापर्व पर्युषण बिजुरी में भव्यता से हो रहे







बिजुरी । श्री पर्वराज पर्यूषण दशलक्षण पर्व श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। दस दिवसीय इस पर्व के दौरान प्रतिदिन भगवान की विशेष पूजा-अर्चना, शांतिधारा एवं विभिन्न धार्मिक विधान संपन्न किए जा रहे हैं। जैन समाज के पुरुष, महिलाएं एवं श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर रहे हैं।

दिगंबर जैन परंपरा के इस महत्वपूर्ण पर्व का शुभारंभ 16 सितंबर भादो सुदी  पंचमी से हुआ है। पर्व के दौरान उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य जैसे दसधर्म की आराधना की जा रही है। दशलक्षण पर्व आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि एवं संयम की साधना का अवसर है, जो श्रद्धालुओं को अहिंसा, क्षमा, त्याग और सदाचार को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। कर्मों की निर्जरा हो आत्मशुद्धि या आत्मा की विशुद्धि मन से कषायों को दूर कर प्राणियों पर दया एवं समता के भाव हो।

दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष मुकेश जैन ने बताया कि यह पर्व आत्मशुद्धि का महापर्व है जिस प्रकार से जैन धर्म का मूल मंत्र अहिंसा परमोधर्म है उसी को आत्मसात आत्म अवलोकन का यह पर्व धर्म के दश लक्षणों के माध्यम से हम अपने जीवन को सार्थक बनाने का यत्न करते हैं,क्रोध, मान,माया,लोभ जैसी कषाय से मुक्ति ही मनुष्य जीवन को बेहतर बना सकती है।

 कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठानों, शोभायात्रा एवं महाआरती सहित विविध आयोजन प्रतिदिन प्रवचन आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं ।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, प्रातः 8 बजे अभिषेक, शांतिधारा होती है।

*क्षमा और मैत्री का संदेश देगा महोत्सव*

जैन धर्म में क्षमावाणी पर्व का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व परस्पर क्षमा, मैत्री, सद्भाव एवं आत्मशुद्धि की भावना को सुदृढ़ करता है। क्षमावाणी के अवसर पर श्रद्धालु जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा याचना करते हैं तथा मन में किसी के प्रति बैरभाव न रखने का संकल्प लेते हैं। अनंत चतुर्दशी को भगवान की शोभायात्रा नगर भ्रमण के साथ पर्यूषण पर्व क्षमावाणी मनाकर संपन्न होंगे बिजुरी जैन समाज के  संतोष जैन,नरेश जैन,सौरभ, जैन, वैभव जैन, विनय कुमार, संजय कुमार, सचिन कुमार,शैलेश जैन, आर्जव जैन,अस्तित्व जैन,साथ महिलाओं द्वारा भी भक्ति पूर्वक पूजन विधान किया जाता है, जिनमें श्रीमती,आशा, सुधा,कुसुम,सारिका जैन,डाली, ज्योति, आकांक्षा, अनामिका,संध्या,सुरभि, अंशिका आदि सम्मिलित हुए।

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