बहन नीलिमा को भावभीनी श्रद्धांजलि
कुछ ही दिनों पहले हुई लंबी बातचीत की यादें आज आंखें नम कर रही हैं
चचाई (अनूपपुर)। जीवन में कुछ मुलाकातें और कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो समय बीतने के बाद भी मन में अपनी गहरी छाप छोड़ जाती हैं। बहन नीलिमा से कार्यक्रम के कुछ ही दिनों बाद फोन पर काफी देर तक बातचीत हुई थी। बातचीत के दौरान उन्होंने आत्मीयता से कहा था— “जब भी मैं अनूपपुर आऊंगी, जरूर आपके घर आऊंगी।” उस समय क्या मालूम था कि यह हमारी आखिरी बातचीत में से एक होगी और उनके ये शब्द हमेशा के लिए स्मृतियों में बस जाएंगे।
नीलिमा और हम लोग उन दिनों एक साथ पढ़ते थे। विद्यार्थी जीवन में वह बेहद शांत स्वभाव की थीं और कम ही बातचीत किया करती थीं। उनकी सादगी, सहजता और शांत व्यक्तित्व आज भी स्मृतियों में उसी तरह जीवंत है।
पिछले दो दिनों से न जाने क्यों बार-बार नीलिमा की याद आ रही थी। मन में बार-बार यही विचार आ रहा था कि उनसे बात कर लूं। फिर सोचा कि शनिवार को छुट्टी रहती है, उस दिन आराम से काफी देर तक बातचीत करूंगा। लेकिन किसे पता था कि शनिवार का दिन उनसे बातचीत करने के बजाय उनके संबंध में एक ऐसी दुखद खबर लेकर आएगा, जिसने मन को भीतर तक झकझोर दिया।
आज उनकी यादें मन में उमड़ रही हैं और आखिरी बातचीत के शब्द बार-बार कानों में गूंज रहे हैं। इंसान भविष्य की योजनाएं बनाता है, मुलाकातों के सपने संजोता है, लेकिन नियति कब कौन-सा मोड़ ले आए, कोई नहीं जानता।
नीलिमा का इस तरह अचानक चले जाना अत्यंत पीड़ादायक है। उनकी स्मृतियां, उनका शांत स्वभाव और उनसे हुई वह आखिरी आत्मीय बातचीत हमेशा याद रहेगी।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
भावभीनी श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।

