भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा पीआर टी महाविद्यालय अनूपपुर में मोबाइल डी-एडिक्शन कार्यशाला आयोजित
“रील लाइफ से निकलकर रियल लाइफ में आएं और उज्ज्वल भविष्य का आधार मजबूत बनाएं” — डॉ. देवेंद्र तिवारी
अनूपपुर। दिनांक 08 सितंबर 2026 भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला अनूपपुर द्वारा सेवा संस्कार अभियान के अंतर्गत कलेक्टर रत्नाकर झा के निर्देशानुसार एवं सभापति डॉ. आर.पी. सोनी के मार्गदर्शन में पीआर टी महाविद्यालय अनूपपुर में मोबाइल डी-एडिक्शन (मोबाइल की लत से मुक्ति) विषय पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की मुख्य वक्ता इस्कॉन अनूपपुर की सुश्री गौरांगी भारद्वाज रहीं।
कार्यशाला में विद्यार्थियों के बीच बढ़ते मोबाइल उपयोग और उसके दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। सुश्री गौरांगी भारद्वाज ने अत्यंत सरल, रोचक एवं प्रेरक शैली में विद्यार्थियों को समझाया कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग एकाग्रता में कमी, मानसिक थकान, आँखों पर प्रतिकूल प्रभाव तथा व्यवहार एवं दिनचर्या में असंतुलन जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल के प्रति अपनी निर्भरता कम करने, समय का सदुपयोग करने, अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करने तथा वास्तविक जीवन के रिश्तों और गतिविधियों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। इनके साथ सुश्री विशाखा ने भी विद्यार्थियों के समक्ष प्रेरक उद्बोधन दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के सदस्यों एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकों का स्वागत किया गया। इसके बाद मुख्य वक्ता सुश्री गौरांगी भारद्वाज ने अपने प्रेरक उद्बोधन के माध्यम से विद्यार्थियों को डिजिटल संतुलन एवं सकारात्मक जीवन शैली का महत्व समझाया। लगभग दो घंटे चले इस सत्र में विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह एवं गंभीरता के साथ सहभागिता की और मोबाइल की लत से बचने के व्यावहारिक उपायों को समझा।
इस अवसर पर भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी से अशोक शर्मा कोषाध्यक्ष, अनिल तिवारी, रामप्रकाश द्विवेदी तथा पीआर टी महाविद्यालय के संचालक एवं रेडक्रॉस सोसायटी अनूपपुर के सचिव डॉ. देवेंद्र तिवारी सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
डॉ. देवेंद्र तिवारी ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन उसका विवेक पूर्ण और सीमित उपयोग ही सफलता का आधार है। विद्यार्थियों को रील लाइफ की आभासी दुनिया में उलझने के बजाय रियल लाइफ के लक्ष्यों, शिक्षा, कौशल विकास और व्यक्तित्व निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। “रील लाइफ से निकलकर रियल लाइफ में आएं और अपने उज्ज्वल भविष्य का आधार मजबूत बनाएं” का संदेश देते हुए उन्होंने डिजिटल संतुलन, समय के सदुपयोग एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता सुश्री गौरांगी भारद्वाज को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। महाविद्यालय परिवार एवं भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से उनके प्रेरणादायी उद्बोधन तथा विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए आभार व्यक्त किया गया।
यह कार्यशाला विद्यार्थियों में मोबाइल के विवेकपूर्ण उपयोग, आत्म-अनुशासन और स्वस्थ डिजिटल आदतों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।



